Thursday 13th of December 2018
कोबरापोस्ट तहकीकात: चुनाव आयोग में 194 नेताओं ने दी PAN की गलत जानकारी, 6 पूर्व सीएम और 10 कैबिनेट मंत्री भी शामिल
एक्सक्लूसिव

कोबरापोस्ट तहकीकात: चुनाव आयोग में 194 नेताओं ने दी PAN की गलत जानकारी, 6 पूर्व सीएम और 10 कैबिनेट मंत्री भी शामिल

कोबरपोस्ट |
October 4, 2018

कोबरापोस्ट ने भारतीय राजनीति के परिपेक्ष में चुनाव आयोग की वैबसाइट पर मौजूद एफिडेविट्स का विश्लेषण किया, जिसमें सामने आया कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा मंत्री और विधायकों ने चुनाव आयोग को अपनी आय का ब्यौरा देते समय अपने पैन की गलत जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स से बचने के लिए और अपकी आय और संपत्ति की सही जानकारी को छिपाने के लिए अक्सर लोग पैन की गलत जानकारियां दर्ज कराते हैं।


रिपोर्टर- कुलदीप शुक्ला

कोबरापोस्ट ने एक विश्लेषण के जरिए इस बात का पता लगाया कि देशभर में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के 194 नेताओं ने भी अपने पैन की गलत जानकारियां दी हैं। इन नेताओं में बड़ी-बड़ी पार्टियों के नामी-गिरामी चेहरे भी शामिल हैं। भारतीय चुनाव आयोग में दर्ज एफिडेविट्स के विश्लेषण से कोबरापोस्ट को पता चला है कि देश के नेताओं ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा देते वक्त एफिडेविट में अपने पैन की गलत जानकारियां चुनाव आयोग को दी हैं।

  • Representation of People Act 1951 के सेक्शन 125(A)(3) के मुताबिक पैन का गलत विवरण देने पर इलेक्शन में चुने गए उम्मीदवार की सदस्यता तक रद्द हो सकती है।
  • भारतीय कानून के तहत, चुनाव से पहले एक उम्मीदवार को उसकी वित्तीय स्थिति (financial status) और उसके खिलाफ आपराधिक मामलों का ब्यौरा देना अनिवार्य है।
  • IT Act के section 139A के मुताबिक अगर किसी शख्स को एक PAN allot कर दिया गया हो तो किसी correction की वजह से वह पैन नंबर नहीं बदला जाता।
  • इसके अलावा IT Act के section 272B के मुताबिक अगर कोई शख्स जानबूझ कर अपने पैन की गलत जानकारियां देता है तो उसपर 10,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी है।

चुनाव आयोग को अपने पैन की गलत जानकारियां देने वाले कुल 194 नेताओं में छह पूर्व मुख्यमंत्री, 10 कैबिनेट मंत्री, 8 पूर्व मंत्री और 54 मौजूदा विधायक, 102 पूर्व विधायक, 1 पूर्व डिप्टी स्पीकर, 01 पूर्व स्पीकर, 01 पूर्व सांसद और 1 उपमुख्यमंत्री शामिल हैं। ये नेता देश की छोटी-बड़ी 29 राजनीतिक पार्टियों से ताल्लुक रखते हैं। बीजेपी, कांग्रेस, सपा, बसपा, जेडीयू, एनसीपी और हिंदुस्तान अवामी मोर्चा (एम) जैसी पार्टियों के नेता इसमें शामिल हैं। चुनाव आयोग में पैन की गलत जानकारियां देने वाले नेताओं में बीजेपी के 41 नेता है। जिनमें 13 मौजूदा विधायक, 15 पूर्व विधायक, 9 मंत्री, 01 पूर्व स्पीकर, 01 पूर्व मंत्री, 01 पूर्व मुख्यमंत्री और 01 गवर्नर शामिल हैं। वहीं ऐसा करने वालों में कांग्रेस के 72 नेता शामिल हैं। जिनमें 13 विधायक, 48 पूर्व विधायक, 01 मंत्री, 05 पूर्व मंत्री, 4 पूर्व मुख्यमंत्री और 01 पूर्व डिप्टी स्पीकर शामिल हैं। इसी फेहरिस्त में समाजवादी पार्टी के 1 विधायक और 11 पूर्व विधायक भी शुमार हैं।  वहीं बसपा के एक विधायक और 7 पूर्व विधायक भी इसी सूचि में शामिल हैं। जेडीयू के 3 विधायक, 01 पूर्व विधायक, 01 पूर्व मंत्री और 1 पूर्व सांसद का नाम है।

कोबरापोस्ट द्वारा इक्ट्ठे किए गए डेटा और उसके विश्लेषण के दौरान कई बड़े नाम सामने आए हैं। इनमें असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और भूमिधर बरमान, जीतन राम मांझी और वीरभद्र सिंह शामिल हैं। इन सभी नेताओं के अलावा राज्य और केंद्र सरकार के कई मौजूदा मंत्रियों के नाम भी शामिल हैं। जिनमें राजस्थान में मंत्री बीना काक, बिहार में कैबिनेट मंत्री नंद किशोर यादव, महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) मंत्री देशमुख विजयकुमार, हरियाणा की महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन और हिमाचल के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री किशन कपूर ने भी चुनाव आयोग को दिए अपनी आय और सम्पत्ति के ब्यौरे में पैन की गलत जानकारियों का इस्तेमाल किया है।

कोबरापोस्ट ने 23 राज्यों के नेताओं द्वारा दाखिल करीब 2000 हलफनामों यानी एफिडेविट्स का विश्लेषण कर इस सच्चाई का पता लगाया है। विश्लेषण में ये बात सामने आई कि साल 2006 और 2016 के बीच इन नेताओं ने भारत के निर्वाचन आयोग के सामने शपथ ली थी और चुनाव आयोग में अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा दिया।  कोबरापोस्ट ने विश्लेषण में पाया है कि इनमें से 194 पैन गलत है। इन गलत पैन का इस्तेमाल लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग में अपनी आय और संपत्ति की घोषणा करने के लिए किया था।

कोबरापोस्ट ने इलैक्शन कमिशन की वैबसाइट (http://affidavitarchive.nic.in/) पर जाकर सैकड़ों एफिडेविट्स को खंगाला। जिसमें से हमने 194 ऐसे एफिडेविट्स को निकाला जिनमें चुनाव में भाग लेने वाले प्रतियोगी ने दो चुनावों के बीच अपना पैन नंबर गलत लिखा हुआ है। यानि की इलैक्शन कमिशन को अपने पैन संख्या की सही जानकारी नहीं दी है। पहले हमने चुनाव आयोग की वैबसाइट से जिन दो चुनावों में उन्होंने भाग लिया, उन चुनावों के दौरान उन्होंने अपना क्या PAN दर्ज कराया इसके बारे में पता लगाया। इस में बैवसाइट पर मौजूद दो अलग-अलग पैन में से कौन सा सही है इसका पता लगाने के लिए हमने इनकम टैक्स की वैबसाइट पर इनके पैन को चैक किया। ज्यादातर मामलों में एक पैन सही और दूसरा गलत पाया गया। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि ये PAN अपने एफिडेविट्स पर खुद इन नेताओं ने ही दर्ज कराए थे।

हैरानी की बात ये है कि अकेले उत्तरप्रदेश में इस तरह के 26 मामले सामने आए हैं। जबकि मध्यप्रदेश 17, बिहार 15 और असम से इस तरह के 13 मामले सामने आए हैं। वहीं उत्तराखंड से 14, हिमाचल प्रदेश से 12 और राजस्थान से 11 मामले सामने आए हैं। ज्यादातर मामलों में ये देखा गया है कि पैन की गलत details को पेश करने के दौरान पैन पर लिखे अंकों के साथ छेड़छाड़ की गई है। या तो इसमें एक या दो अंक बदल दिए गए या फिर उन्हें आगे-पीछे कर दिया गया। हैरानी वाली बात ये भी है कि चुनाव आयोग में पैन की गलत जानकारियां देने वाले नेताओं में कुछ के खिलाफ गंभीर आरोप तक दर्ज हैं।

अब हम आपको इनमें से कुछ नेताओं के बारे में विस्तार से बताते हैं-

1 - हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता प्रेम कुमार धूमल ने चुनाव आयोग में अपने पैन की गलत जानकारी दर्ज कराई है। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में धूमल ने चुनाव आयोग में दिए एफिडेविट में अपना पैन नंबर AAKTD99648 बताया। लेकिन पांच साल बाद हुए अगले चुनावों में, उन्होंने एक अलग पैन AAKPD9964E बताया। धूमल के खिलाफ IPC की धारा 188, 186, 143, 499 और 500 के तहत पांच आपराधिक मामले लंबित हैं।

2 - हिमाचल प्रदेश के पांच बार बीजेपी विधायक और चार बार मंत्री किशन कपूर का सबसे दिलचस्प मामला सामने आया। साल 2007 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी आय और संपत्ति घोषित करने वाले शपथ पत्र में वरिष्ठ भाजपा नेता ने अपना पैन नंबर AFYPK8382G बताया, लेकिन अगले विधानसभा चुनावों में इन्होंने चुनाव आयोग में एक अलग पैन AFUPK8382G दर्ज किया। किशन कपूर के ऊपर नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें अपहरण, दंगा भड़काना, आपराधिक षड्यंत्र रचना और धमकी देने जैसे आरोप शामिल हैं, इनपर  धारा 171E, 365, 147, 149, 342, 120B, 506, 34 और 341 के तहत मामले दर्ज हैं।

3 - बीजेपी नेता और हरियाणा में कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने भी दो अलग-अलग चुनावों के दौरान दो पैन नंबरों का इस्तेमाल किया है.. पहला AASPJ1161D और दूसरा ACSPJ1161D.

4 - महाराष्ट्र के एक और मौजूदा मंत्री देशमुख विजयकुमार सिद्रामप्पा ने भी अपनी संपत्ति घोषित करते हुए डुप्लिकेट पैन का इस्तेमाल किया है। इनके खिलाफ भी कई आपराधिक मामले लंबित हैं। सोलापुर सिटी नॉर्थ से बीजेपी विधायक सिद्रामप्पा ने भी दो पैन की जानकारियां दर्ज की हैं। AADHV5252L और AQOPD2749M… सिद्रम्मप्पा के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 341 और 147 के खिलाफ पांच आपराधिक मामले लंबित हैं। सिद्रम्मप्पा के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 341 और 147 के खिलाफ पांच आपराधिक मामले लंबित हैं।

5 - हरिद्वार के रहने वाले 52 वर्षीय मदन कौशिक तीन बार विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं। साल 2007 में राज्य विधानसभा के लिए चुने गए कौशिक को जीत के साथ-साथ कैबिनेट में भी जगह मिली। कौशिक साल 2012 में और 2017 में फिर से अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए। साल 2007 में, कौशिक ने अपने एफिडेविट में पैन नंबर AOCPK7727K का इस्तेमाल किया। वहीं साल 2012 के चुनाव में उन्होंने पैन नंबर AOCPK7727G का इस्तेमाल किया।

6 - मध्यप्रदेश बीजेपी का एक बड़ा चेहरा माने जाने वाले पारस चंद्र जैन ने दो चुनावों के दौरान दो अलग पैन की जानकारियां दर्ज की हैं। उज्जैन से बीजेपी के टिकट पर पांच बार विधायक और साल 2005 से बीजेपी की अलग-अलग सरकारों में चार बार मंत्री रहे पारस जैन ने साल 2008 के चुनाव के दौरान अपनी आय और संपत्ति की घोषणा के लिए इलेक्शन कमिशन को दिए ब्यौरे में अपना पैन नंबर ABNPJ7597F बताया था। लेकिन साल 2013 के अगले विधानसभा चुनाव में इन्होंने अपना पैन नंबर ABNP37797F दर्ज कराया। जैसे-जैसे पार्टी और सरकार में पारस जैन का कद बढ़ा वैसे-वैसे उनकी आय और संपत्तियां भी बढ़ती गईं। साल 2008 से साल 2013 के बीच इनकी संपत्तियों में चार गुना इज़ाफा हुआ। साल 2008 में जैन ने घोषणा पत्र में अपनी आय और संपत्तियों 1.41 करोड़ रुपये बताई थी, जो साल 2013 में चार गुणा बढ़कर 5.40 करोड़ रुपये हो गई।

अपनी तहकीकात के पहले हिस्से में हमने बीजेपी के कुछ बड़े और नामी नेताओं के बारे में दिखाया जिन्होंने चुनाव आयोग में पैन की गलत जानकारियां दर्ज कराईं। लेकिन ऐसा करने वालों में कांग्रेस के भी कई बड़े चेहरे शामिल हैं। यही नहीं छोटी और स्थानीय पार्टियों के नेताओं ने भी दो चुनावों के दौरान पैन की दो अलग-अलग जानकारी चुनाव आयोग में दर्ज कराईं। तहकीकात के दूसरे हिस्से में हमने कांग्रेस, एनसीपी और हिन्दुस्तान आवामी मोर्चा के कुछ नेताओं के गलत पैन, उनकी आर्थिक स्थिति में अथाह वृद्धि और उनपर दर्ज आपराधिक मामलों के बारे में दिखाया है।   

7 - असम के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके और छह बार लोकसभा सांसद रहे तरुण गोगोई ने भी दो अलग-अलग चुनाव में पैन की अलग जानकारियां दी हैं। साल 2006 के विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग में दायर किए एफिडेविट के मुताबिक, गोगोई के पास ACOPG06834 नंबर वाला पैन था, लेकिन साल 2011 के अगले चुनावों में कांग्रेस नेता ने एक अलग पैन ACOPG0683M बताया था। हालांकि, गोगोई परिवार ने इन दोनों चुनावों के बीच जबरदस्त आर्थिक तरक्की की। साल 2011 के चुनाव में इन्होंने जो एफिडेविट चुनाव आयोग में जमा किया था उसके मुताबिक साल 2006 में उनकी कुल संपत्ति 90,23,616 रुपये थी। जबकी साल 2011 में इनकी संपत्ति 4,94,19,349 रुपये हो गई।

8 - 2006 के विधानसभा चुनावों में अपनी संपत्ति घोषित करते हुए, गोगोई के पूर्ववर्ती और सात बार के विधायक भूमिधर बर्मन ने अपना पैन नंबर ACBPD0559N दर्ज कराया था, लेकिन अगले चुनावों में उन्होंने दूसरा पैन नंबर ACBPB0559N दर्ज कराया है। बर्मन पर आरोप है कि उन्होंने असम के सुदूर इलाकों में मदरसे बनाने के लिए एक जेहादी को पैसा भी दिया था।

9 - कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह के मामले में भी चुनाव आयोग से झूठ बोलने की बात सामने आई है। तहकीकात में पता लगा कि वीरभद्र सिंह ने भी चुनाव आयोग में गलत पैन का इस्तेमाल किया है। साल 2007 के चुनावों के लिए एफिडेविट में सिंह ने अपना पैन ALPRS6513N बताया था, जबकि साल 2012 में एक और पैन नंबर ALRPS6513N बताया। चार बार मुख्यमंत्री, सात बार के विधायक और हिमाचल से पांच बार सांसद चुने गए वीरभद्र सिंह पर मनी लॉड्रिंग का भी आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय ने इन्हें 7 करोड़ के मनी लॉड्रिंग मामले में भी तलब किया था। इसके अलावा वीरभद्र और उनकी पत्नी को आय से अधिक संपत्ति मामले में तलब किया जा चुका है।

10 - महाराष्ट्र के अमरावती से कांग्रेस विधायक रावसाहब शेखावत ने भी चुनाव आयोग के अधिकारियों को गुमराह करते हुए दो अलग-अलग पैन का इस्तेमाल किया। 2009 के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग को दिए शपथपत्र में उन्होंने अपना पैन नंबर AAOPS5785J दर्ज किया, शेखावत को राजेंद्र के नाम से भी जाना जाता है लेकिन साल 2014 में इन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा एक अलग पैन AAOPS8785J के जरिए दिया। साल 2012 में पूर्व कांग्रेस विधायक उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब विधानसभा चुनावों के दौरान उनकी गाड़ी से 1 करोड़ रुपये कैश बरामद किया गया था। शेखावत ने साल 2009 में अपनी कुल संपत्ति 6,68,67,682 रुपये दर्ज कराई। जबकि 2014 के चुनाव में इनकी संपत्ति बढ़कर 15,90,35,582 रुपये हो गई। 

11 - हरियाणा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता राव नरेन्द्र सिंह का मामला भी काफी दिलचस्प है। साल 2009 के एफिडेविट में अपना पैन AIDPS2060F बताया था, लेकिन साल 2014 के अगले विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक और पैन AIBPS2060F बताया। एक दशक या उससे भी कम समय में, तीन बार कांग्रेस विधायक रहे राव नरेन्द्र सिंह की संपत्ति दोगुनी से भी अधिक हुई है। साल 2005 में, सिंह ने अपने घोषणापत्र में अपनी संपत्ति 2.24 करोड़ रुपये दर्ज कराई थी..लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि साल 2014 में उनकी घोषित संपत्ति में 100 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई और ये बढ़कर 5.26 करोड़ रुपये  हो गई।

12 - बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के लिए भी पैन के अंकों को बदलना बांए हाथ का खेल है। चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल शपथ पत्र में, मांझी ने 2010 के चुनावों में अपना पैन नंबर AKTPM06424H दर्ज किया था। लेकिन 2015 के चुनावों में शपथ पत्र के लिए उनके पास एक अलग पैन AKTPM0642H था।  

13 - महाराष्ट्र में माढा से चार बार एनसीपी विधायक बबनराव शिंदे ने भी इलेक्शन कमिशन को दिए एफिडेविट्स में दो अलग पैन दर्ज कराए हैं। साल 2009 के चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय शिंदे ने पैन AAPHS9430Q का इस्तेमाल किया, लेकिन 2014 के चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति की घोषणा करने के लिए एक अलग पैन AABHB9430Q का इस्तेमाल किया।

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जिन नेताओं ने हमें ई-मेल के जरिए अपने जवाब भेजे हैं, उन्हें हमने अपनी स्टोरी में शामिल किया है, भविष्य में अगर बाकी नेताओं से हमें ई-मेल का जवाब मिलता है तो हम उनके जवाब भी अपनी स्टोरी में शामिल करते रहेंगे।

अपने पैन की गलत और झूठी जानकारियों के जरिए चुनाव आयोग को गुमराह करने वाले नेताओं से इस बारे में कोबरापोस्ट की टीम ने बातचीत की और ऐसा करने के पीछे वजह जानने की कोशिश की। कांग्रेस नेता और अरुणाचल प्रदेश में राज्य मंत्री जरकार गैमलिन ने कहा कि उन्हें याद नहीं कि उनके पैन की details सही नहीं हैं। असम के ही एक और नेता कुशल दोवारी ने अपना सही पैन कनफर्म कराया और बताया कि हो सकता है कि typing error के चलते ऐसा हुआ हो। असम के ही एक और कांग्रेस नेता गौतम बोरा ने कहा कि ऐसा गलती से हो गया है और वो उसे चैक कराएंगे। असम की एक और कांग्रेस नेता प्रणाती फूकन ने कहा कि उनके पास एक ही पैन है, चुनाव आयोग में दूसरा पैन कैसे दर्ज हुआ इन्हें मालूम नहीं। इसी तरह हमने कई नेताओं से इस गड़बड़ी के बारे में जानने की कोशिश की लेकिन हर कोई गोल-मोल जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ता नज़र आया..सबने यही कहा कि उन्हें नहीं पता या फिर गलती से ऐसा हुआ होगा। इसके अलावा हमने राजस्थान के एक और बीजेपी विधायक पूरा राम चौधरी से बात की तो इन्होंने कहा कि इलेक्शन खत्म हो गया है इस बारे में उन्हें कुछ नहीं मालूम उनके वकील को मालूम होगा।

अपनी तहकीकात में हमने जिन नेताओं की पैन संख्या में फर्क देखा हमने उन्हें एक ई-मेल भेजकर इस गड़बड़ी की वजह जानने की कोशिश की। करीब डेढ़ सौ नेताओं से हमने इस संदर्भ में ईमेल के जरिए जवाब मांगे, हालांकि हमें राजिस्थान की मंत्री बीना काक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री ताज मोयुद्दीन से ही ईमेल पर जवाब मिले। बीना काक ने कहा कि उनके पहले PAN में DATE OF BIRTH यानी जन्मतिथी ठीक दर्ज नहीं थी, लिहाजा जब उन्होंने पैन में CORRECTION कराया को पैन नंबर ही बदल गया। यही वजह है कि उन्होंने दो अलग चुनावों के दौरान दो पैन का विवरण चुनाव आयोग को दिया। वहीं जीतन राम मांझी का कहना है कि नामांकन भरते समय चार सेट में अपना विवरण भरना होता है, हो सकता है कि गलती से किसी एक सेट में गलत संख्या दर्ज हो गई हो और बाकी तीन सेट में सही संख्या दर्ज हो। वहीं ताज मोयुद्दीन ने अपना पैन confirm कराते हुए बताया कि उन्होंने साल 2008 और साल 2014 के चुनावों में एक ही पैन दर्ज कराया है, हो सकता है कि संबंधित अधिकारियों ने गलती से पैन नंबर लिखते समय उसे गलत type कर दिया हो।  

जिन नेताओं ने हमें ईमेल के जरिए अपने जवाब भेजे हैं उनके जवाब पढ़ने के लिएclick करें -

इस पूरी तहकीकात में कोबरापोस्ट कहीं भी ये दावा नहीं करता कि जिन 194 नेताओं के PAN की Details गलत पाई गई हैं उन सभी ने जानबूझ कर चुनाव आयोग को PAN की गलत जानकारियां दी हैं। हो सकता है कि कुछ मामलों में गलती से PAN के अंकों में फेरबदल हुई हो। लेकिन सभी मामलों में ऐसा हुआ है यकीन करना मुश्किल है।  


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