राष्ट्रीय “ऑपरेशन 136” पर राहुल गांधी का बड़ा बयान

“ऑपरेशन 136” पर राहुल गांधी का बड़ा बयान

देश और विदेश में कोबरा पोस्ट के “ऑपरेशन 136” की जहां ख़ासी चर्चा हो रही है वही देश के  राजनेताओं की भी इस खुलासे पर प्रतिक्रियाएं आ रही है


By Cobrapost.com - March 28, 2018

क्या आपको ये रिपोर्ट पसंद आई? हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं. हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें.

ऑपरेशन 136 पर राहुल गांधी का बड़ा बयान

देश और विदेश में कोबरा पोस्ट के “ऑपरेशन 136” की जहां ख़ासी चर्चा हो रही है वही देश के  राजनेताओं की भी इस खुलासे पर प्रतिक्रियाएं आ रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद अब twitter के जरिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मीडिय समूहों को नसीहत दी है। राहुल गांधी ने अपने ट्विट में कहा है कि “ मैं उनसे कभी नफरत नहीं कर सकता जो सच्चाई को चालाकी से तोड़मड़ोर कर और झूठी खबरों के सहारे मेरे खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए ये एक व्यापार है, पैसों के लिए नफरत भी बेची जा रही है, जैसा की कोबरापोस्ट के खुलासों से दिखता है। मैं खुशकिस्मत और सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि वो मेरे खिलाफ झूठ बोल कर अपनी रोजीरोटी चला रहे हैं”। (I can never hate those who try to stir up hate against me, with fake stories and their cunning twisting of fact.

those who try to stir up hate against me, with fake stories and their cunning twisting of fact.

For them it’s just business; hate sold for a price, as the Cobrapost expose shows.

I’m blessed and honoured that they make their livelihoods spinning lies about me.)

गौरतलब है कि देशभर में कई महीनों तक चली कोबरा पोस्ट की इस तहकीकात “ऑपरेशन 136” में कई बड़ी और नामी मीडिया कंपनियों को पैसे के आगे निष्पक्ष पत्रकारिता से समझौता करते पाया गया है। देश के कई बड़े मीडिया संस्थान हिंदुत्व के नाम पर धुव्रीकरण के लिए तैयार दिखे तो कुछ विपक्षी दलों के बड़े नेताओं का दुष्प्रचार करने के लिए राजी हो गए। यहां तक की सत्ताधारी पार्टी के लिए इन लोगों ने पत्रकारिता की प्रतिष्ठा को दांव पर रखते हुए नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने वालों के खिलाफ खबरें बनाने पर भी अपनी रजामंदी जाहिर की। देशभर में आंदोलन करने वाले किसानों को माओवादियों द्वारा उकसाए हुए बताकर सरकार की नीतियों का महिमामंडन करने के लिए भी ये सहमत हो गए। सबसे बड़ी बात ये कि न्यायपालिका के फैसलों पर प्रश्नचिन्ह लगाकर उन्हें लोगों के सामने पेश करने में भी इनको कोई गुरेज़ नहीं था।

 


क्या आपको ये रिपोर्ट पसंद आई? हम एक गैर-लाभकारी संगठन हैं. हमारी पत्रकारिता को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें.

Tag : ,

Loading...

चर्चित खबरें

एक्सक्लूसिव