Wednesday 19th of December 2018
EXCLUSIVE: कोबरा पोस्ट और इंडिया न्यूज़ की बड़ी पड़ताल, PM मोदी की कैशलेस मुहिम के खिलाफ चल रहा गोरखधंधा, देखें वीडियो
एक्सक्लूसिव

EXCLUSIVE: कोबरा पोस्ट और इंडिया न्यूज़ की बड़ी पड़ताल, PM मोदी की कैशलेस मुहिम के खिलाफ चल रहा गोरखधंधा, देखें वीडियो

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January 3, 2017

EXCLUSIVE: कोबरा पोस्ट और इंडिया न्यूज़ की बड़ी पड़ताल


कोबरापोस्ट और इंडिया न्यूज़ की खास तहकीकात, ‘ऑपरेशन ब्लैक मशीन’  जिसमें में सामने आया कि नोटबंदी के बाद कैसे देशभर में स्वाइप मशीनें बेचने वाली निजी कंपनियां अपने फायदे के लिए, नियम कानून को तोड़कर अपनी स्वाइप मशीनों को ऐसे हाथों में सौंप रही हैं, जहां उनका इस्तेमाल घातक साबित हो सकता है, और इससे देश की सरकार, अर्थव्यवस्था और आम जनता को भी नुकसान भुगतना पड़ सकता है।

एक तरफ हम कैशलेस इंडिया का सपना देख रहे हैं, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन्स पर जोर दे रहे हैं, लेकिन जब बारी आती है इस सपने को साकार करने की तो सबसे पहले स्वाइप मशीनों का जिक्र होता है। जिसके इस्तेमाल से हम अपने डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से सीधा पेमेंट कर सकते हैं। लेकिन कंपनियां इन स्वाइप मशीनों को उन लोगों को भी धड़ल्ले से बांट रही है, जो इनका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। कैसे ? पढ़िए पूरी रिपोर्ट-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मंत्री ने देश में फैले भ्रष्टाचार को रोकने और कालेधन पर लगाम लगाने के लिए 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का फैसला लिया। इस फैसले के बाद लोगों के सामने कैश की भारी किल्लत देखी गई। बैंकों और एटीएम के बाहर लोग घंटों लाइन में लगकर रुपये निकालने पहुंचे, इसी बीच सरकार का तर्क था कि इस फैसले से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बढावा मिलेगा और काले धन पर रोक लगेगी। इसके बाद स्वेपिंग मशीनों की डिमांड रातों रात इतनी बढ गई की इन मशीनों की पूर्ति करना बैंको के लिए मुश्किल हो गया।

ऐसे में सबसे ज्यादा फायदा उन थर्ड पार्टी कंपनियों को हुआ जो कि बैंको को गारंटर बना के स्वेपिंग मशीन की सर्विस देने का काम करती है….आरबीआई के डाटा के मुताबिक नोटबंदी के बाद से 1.6 मीलियन कैशलेस ट्रांजेक्शन बढ गईं, जबकि इससे पहले सिर्फ 50 मीलियन लोग ही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते थे। इससे ये बात तो साफ हो गई कि यकिनन केंद्र सरकार के इस फैसले से कैशलैस सिस्टम को बढावा मिला है। सब्जीबाले से लेकर छोटे दुकानदार और चाय बेचने वाले तक ने स्वाइपिंग मशीनों के जरिए कैशलेस लेन-देन शुरू किया, और पीएम मोदी के सपने को साकार करने में बड़ी भागीदारी निभाई।

लेकिन ऐसे में सवाल एक बार फिर वही खड़ा हो गया है कि क्या ऐसा करने से वाकई काले धन पर ब्रेक लगा है, और क्या सरकार के इस फैसले से वाकई घूसखोरी बंद हो गई ? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए कोबरोपोस्ट की टीम ने तहकीकात की। आप भी देखिए स्वाइपिंग मशीन के जरिए कैसे अभी भी कुछ लोग काले कारनामों और रिश्वतखोरी कर रहे हैं।

इस तहकीकात का मकसद उन लोगों की सच्चाई को दिखाना था जो पीएम मोदी के डिजिटल इण्डिया के सपने में सेंध लगा रहे हैं, क्योंकि एक तरफ सरकार नोटबंदी के फैसले को कालेधन के खिलाफ बडा प्रहार बता रही है वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कैशलैस सिस्टम को हथियार बनाकर कालेधन वसूलने की कोशिश में लगे हैं।

चाहे वो रिश्वत से कमाया जाने वाला रुपया हो, या फिर किसी सर्राफा व्यापारी के जरिए काला धन खपाने की कोशिश, यही नहीं एनजीओ चालक डोनेशन में मिलने वाली रकम को स्वाइपिंग मशीन के जरिए बड़े आराम से अपने निजी खाते में से निकाल सकते हैं  और हवाला कारोबारी भी इनके जरिए कालाधन ठिकाने लगाने की कोशिश में लगे हैं। और तो और इस मशीन के इस्तेमाल से सैक्स रैकेट चलाने वाला शख्स भी रोजना अपने ग्राहकों से पैस ले सकता है ? ये तमाम बाते हमारी इस तहकीकात में सामने आईं।

अब सवाल ये है कि ऐसे लोगों को आखिर स्वाइप मशीनें देगा कौन? इसके लिए आपको इंडियन ओवरसिज बैंक का एक दस्तावेज दिखाते हैं, जिसमें साफ साफ लिखा है कि बचत खाता केवल आपकी बचत के लिए है ना कि बिजनेस करने के लिए। अब सवाल उठता है कि कुछ चुनिंदा निजी कंपनियां आखिर किस आधार पर लोगों को धडल्ले से उनके निजी खातों पर स्वाइपिंग मशीन मुहैया करा रही हैं।

सवाल ये भी हैं कि..

1 – क्या निजी खातों पर स्वाइपिंग मशीन दी जा सकती है ?

2 – क्या निजी खातों से कोई रोजाना बिजनेस ट्रांजेक्शन कर सकता है ?

3 – क्या स्वाइपिंग मशीन मुहैया कराने से पहले केवाईसी अनिवार्य नहीं है ?

4 – क्या स्वाइपिंग मशीन देने से पहले खाता धारक का वेरिफिकेशन होना अनिवार्य नहीं है ?

5 – क्या जान बूझकर निजी कंपनियां अपनी मशीनें बेचने के लिए किसी को भी उसके निजी खातों पर स्वेपिंग मशीन मुहैया करा रही हैं, बगैर ये जानें कि उसका कोई व्यवसाय है या नहीं ?

 

6 – क्या आरबीआई द्वारा स्वाइपिंग मशीनें मुहैया कराने को लेकर कोई स्पष्ट व सख्त दिशा निर्देश नहीं है ?

ये वो सवाल हैं जो लोगों को स्वाइपिंग मशीन मुहैया कराने वाली हर कंपनी के ज़हन में होने चाहिए। ताकि उसे पता रहे कि किस शख्स को स्वाइपिंग मशीन दी जानी चाहिए और किसे नहीं।

तहकीकात में सामने आया कि जनता को स्वाइपिंग मशीन मुहैया कराने वाली कंपनियां किस तरह नियमों का उल्लंघन कर, काले धंधे में शामिल लोगों को स्वाइप मशीन बांट रही हैं। अपने फायदे के लिए ये कंपनियां उन लोगों को भी मशीन दे रही हैं, जो गैरकानूनी कामों के लिए इन मशीनों का गलत इस्तेमाल करते हैं। हैरानी वाली बात ये है कि कई जानी-मानी निजी कंपनियां सबकुछ जानते हुए भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को धड़ल्ले से ये मशीने बांट रही हैं।

कोबरापोस्ट और इंडिया न्यूज़ की खास तहकीकात में हमने ऐसी कई जानी-मानी निजी कंपनियों का खुलासा किया, जो आरबीआई की गाइनलाइंस को धता बताकर, बिना वैरिफिकेशन किए लोगों को स्वाइप मशीने मुहैया करा रही हैं और मोटी कमाई कर रही हैं।

हमारी टीम ने इन कंपनियों के बड़े अधिकारियों से बातचीत की और स्वाइप मशीन की मांग की। सैक्स रैकेट से लेकर, हवाला कारोबार तक, एनजीओ की डोनेशन में हेराफेरी से लेकर, रिश्वतखोरी तक.. हर काम के लिए मशीन की मांग की… हैरानी वाली बात ये है कि हर काम के लिए इन कंपनियों के अधिकारी हमें मशीने मुहैया कराने के लिए राजी हो गए।

इतना ही नहीं वैरिफिकेशन से कैसे बचना है, कैसे बैंक की आंखों में धूल झोंकनी है, कैसे खुद को टैक्स के फंदे से बचाना है और कैसे बचत खाते का गलत इस्तेमाल कर उसे कंपनी अकाउंट की तरह इस्तेमाल करना है। ये तमाम गुर भी इन कंपनियों के अधिकारियों ने हमारी टीम को बेझिझक बता दिए। इनका तो सिर्फ एक ही मकसद था कि कैसे ज्यादा से ज्यादा मशीनें बेचें और कैसे अपना मुनाफा कमाएं। भले ही इस कोशिश में अपराधिक प्रवृति के लोगों को फायदा पहुंचे और भले ही सरकार को मोटा चूना लग जाए। इसकी इऩ्हें कोई परवाह नहीं। ये तो बस अपना फायदा कमाना चाहते हैं।

सैक्स रैकेट चलाने वाले किस तरह स्वाइप मशीन के जरिए पेमेंट ले सकते हैं और उसे अपने बचत खाते में जमा करा सकते हैं। हवाला का कारोबार करने वाले तीस लाख तक की कमाई को कैसे बिना टैक्स दिए हजम कर सकते हैं, रिश्वत खोरी करने वाले कैसे 10 रूपये से लेकर हजारों रूपये तक की रिश्वत इन मशीनों के जरिए ले सकते हैं। ये तमाम हथकंडे स्वाइप मशीन बेचने वाली कंपनियों के अधिकारियों ने बताए।

इस कहानी के मुख्य किरदार हैं M SWIPE नाम की कंपनी के दिल्ली ब्रांच के एरिया मैनेजर इन्द्रजीत सिंह, एरिया मैनेजर इन्द्रजीत ने हमें हेरा-फेरी के तमाम ऐसे गुर सिखा दिए, जिनके इस्तेमाल से कोई भी शख्स अपने बचत खाते पर स्वाइप मशीन के जरिए 10 लाख तक की ट्रांजेक्शंस कर सकता है। बिना कंपनी खाते के बचत खाते के जरिए छोटा-मोटा बिजनेस कर सकता है, और वो भी सरकार को बिना टैक्स दिए।

 

इसके बाद इसी कंपनी के सेल्स मैनेजर विक्रम सिंह भी अपने ग्राहकों को सबकुछ जानते हुए भी स्वाइप मशीन मुहैया कराने के लिए राजी हो गए। मसलन चाहे वो ग्राहक सैक्स रैकेट का धंधा करे या फिर हवाला का कारोबारी हो और चाहे वो एनजीओ में आने वाली डोनेशन को पर्सनल खाते में जमा करने की बात ही क्यों न हो, ये जनाब हर ग्राहक को स्वाइप मशीनें मुहैया कराने के लिए तैयार दिखे और इस हेराफेरी के लिए इन्होंने ग्राहक की मदद भी करने का भरोसा दिया।

इसके बाद M Swipe नाम की कंपनी के ही टीम लीडर राजेश और सुमित कुमार सिंह भी इस पूरे कारोबार को हवा देने में किसी से पीछे नहीं है। ये भी कैंसल चैक और आईडी प्रूफ की बदौलत किसी भी ग्राहक को आसानी से सेविंग अकाउट पर स्वाइप मशीन मुहैया कराने के दावे करते हैं।

M Swipe के अलावा इस क्षेत्र की एक और दिग्गज कंपनी Pay Near के एस्सिटेंट मैनेजर सुमित श्रीवास्तव से भी बात की और इनका जवाब भी कुछ ऐसा ही था। साथ ही पे नियर के डायरेक्ट सेल्स डिपार्मेंट के हिमांशु शेखर सिनियर सेल्स एग्जिक्यूटिव मो. आजाद अल्वी ने भी हवाला कारोबार और सेक्स रैकेट चलाने वालों के भी स्वाइप मशीन लगवाने का रास्ता दिखाया। इतना ही नहीं हिमांशु शेखर ने तो ट्रैफिक पुलिस वाले की रिश्वत और एनजीओ की डोनेशन निजी खाते में लेने के गुर भी बताए।

स्वाइप मशीन देने वाली एक और बड़ी कंपनी कार्ड पे के नेशनल सेल्स हेड अंशुल चौधरी भी कुछ ऐसे ही दावे करते नजर आए।

हमारी ये तहकीकात देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे कि कैसे डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में मदद करने वाली स्वाइप मशीन कंपनियां, अपने फायदे के लिए देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा चूना लगा रही हैं और गैर कानूनी कारोबार को हवा देने में मददगार साबित हो रही हैं।

स्वाइप मशीनों के जरिए निजी कंपनियां कैसे गड़बड़ी कर रही हैं ये आपको दिखाने के लिए हमने दिल्ली और एनसीआर की M SWIPE, PAY NEAR और CARD PAY  नाम की कई कंपनियों के बड़े अधिकारियों से बातचीत की। ये तमाम बातें हमारे खुफिया कैमरे में कैद हुईं, जो इंडिया न्यूज़ चैनल पर प्राइम टाइम शो में ऑपरेशन ब्लैक मशीन के जरिए दिखाई गईं। कोबरापोस्ट के इस ऑपरेशन को देखने के बाद आपको अंदाजा हो जाएगा कि कितने बड़े पैमाने पर स्वाइप मशीनों के जरिए धोखाधड़ी का धंधा बढ़ रहा है। इस तहकीकात के दौरान कार्ड स्वाइप मशीनें बेचने वाली बड़ी और नामी कंपनियों की हकीकत जरूर सामने आ गई। कैसे अपने फायदे के लिए ये कंपनियां लोगों को अपराध के दलदल पर धकेल रही हैं और उन्हें धोखाधड़ी के गुर सिखा रही हैं।


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