Saturday 23rd of March 2019
नरेंद्र मोदी जितने बड़े सुधारवादी दिखते हैं उतने हैं नहीं- दी इकोनॉमिस्ट
बिजनेस

नरेंद्र मोदी जितने बड़े सुधारवादी दिखते हैं उतने हैं नहीं- दी इकोनॉमिस्ट

|
March 23, 2019

अंतरराष्ट्रीय कारोबारी पत्रिका दी इकोनॉमिस्ट ने अपने ताजा अंक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कवर स्टोरी (आवरण लेख) प्रकाशित की है। पत्रिका ने पीएम मोदी के कामकाज की आलोचनात्मक समीक्षा करते हुए लिखा है



अंतरराष्ट्रीय कारोबारी पत्रिका दी इकोनॉमिस्ट ने अपने ताजा अंक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कवर स्टोरी (आवरण लेख) प्रकाशित की है। पत्रिका ने पीएम मोदी के कामकाज की आलोचनात्मक समीक्षा करते हुए लिखा है कि “उनकी सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल में उल्लेखनीय आर्थिक सुधार करने में विफल रही है।” “भारतीय प्रधानमंत्री जितने बड़े सुधारवादी दिखते हैं उतने हैं नहीं” शीर्षक लेख में पत्रिका ने भारत में एक जुलाई से लागू हो रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीेएसटी) की भी आलोचना की है। पत्रिका ने जीएसटी को बेवजह जटिल और लालफीताशाही वाला कानून बताया है। पत्रिका ने मोदी सरकार द्वारा किए गए नोटबंदी को भी विकास विरोधी और कारोबार विरोधी बताया है। पत्रिका के अनुसार नोटबंदी से वैध कारोबारियों को जितनी दिक्कत हुई उतनी काले धंधे वालों को तकलीफ नहीं हुई।

इसे भी पढ़िए :  RBI ने 13 और बैंकों पर लगाया 27 करोड़ रुपये का जुर्माना

पत्रिका ने लिखा है कि मोदी सरकार के पास पिछले कुछ दशकों का सबसे प्रचंड बहुमत है और विपक्ष पूरी तरह ओजहीन है फिर भी वो बड़े स्तर पर आर्थिक सुधार नहीं लागू कर सकी। पत्रिका ने पीएम नरेंद्र मोदी के सुधार लागू करने की काबिलयित पर भी सवाल उठाए हैं। पत्रिका के अनुसार मोदी सरकार वर्तमान वैश्विक अवसरों और लाभदायक घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों का फायदा नहीं उठा सकी।

दी इकोनॉमिस्ट

पत्रिका ने लिखा है, “उनकी कारोबार के लिए मित्रवत नेता की छवि मुख्यतः इस आधार पर बनी है कि वो मुश्किल में पड़ी संस्थाओं की मदद पुरजोर कोशिश करते हैं….किसी एक फैक्ट्री को जमीन दिलवा देना या कहीं बिजलीघर निर्माण में तेजी ला देना। लेकिन वो व्यवस्थित तरीके से काम करने में अच्छे नहीं हैं जिससे अर्थव्यवस्था को जड़ बनाने वाले मुश्किलों का हल निकाला जा सके…भारत को केवल बिजलीघर या विकास के लिए जमीन के टुकड़े भर नहीं चाहिए। उसे बिजली और जमीन के लिए सुचारू बाजार चाहिए, नकदी और श्रम क्षमता चाहिए।”

इसे भी पढ़िए :  VoLTE फीचर फोन के साथ मार्केट की तस्वीर बदल सकता है जियो

पत्रिका ने मोदी सरकार के कार्यकाल में सार्वजनिक क्षेत्र की बहसों का सिकुड़ते आकाश पर भी सवाल उठाया है। पत्रिका ने लिखा है कि “हिदू राष्ट्रवादी ठग” किसी को भी धमका देते हैं और भारत सरकार देश के सेकुलर परंपरा से कथित तौर पर दूर जा रही है। पत्रिका ने टीवी चैनल एनडीटीवी के प्रमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के घर और दफ्तर पर जांच एजेंसी सीबीआई के छापे को मोदी सरकार की “दबंगई” बताया है।

इसे भी पढ़िए :  अब ऑनलाइन मिलेंगे मोदी कुर्ता, गौमुत्र और गाय के गोबर से बने सामान, RSS शुरु करेगा ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल

पत्रिका ने लिखा है कि पीएम मोदी “सुधारवादी” से ज्यादा “अंध-राष्ट्रवादी” हैं। पत्रिका के अनुसार पीएम मोदी “चापलूसी भरी व्यक्तित्व पूजा” के केंद्र बन चुके हैं। पत्रिका ने आशंका जतायी है कि ये सब आगामी चुनाव जीतने के लिए अपनाया गया हथकंडा हो सकता है क्योंकि ये समझना बहुत टेढ़ी खीर नहीं है कि वो गलत दिशा में जा रहे हैं।


If you like the story and if you wish more such stories, support our effort Make a donation.




Loading...

If you believe investigative journalism is essential to making democracy functional and accountable support us. »