Wednesday 26th of June 2019
किसानों के कर्ज माफी पर अपनी पीठ थपथपा सकती है योगी सरकार, आज 6 महीनों का लेखा – जोखा प्रस्तुत करेगी
राष्ट्रीय

किसानों के कर्ज माफी पर अपनी पीठ थपथपा सकती है योगी सरकार, आज 6 महीनों का लेखा – जोखा प्रस्तुत करेगी

aaj tak |
September 19, 2017

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आज अपना 6 महीना पूरा कर रही है। 19 मार्च कि शाम को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब लोग योगी के सीएम बनने पर अचंभित थे।



उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आज अपना 6 महीना पूरा कर रही है। 19 मार्च कि शाम को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब लोग योगी के सीएम बनने पर अचंभित थे। लेकिन लोगों की उम्मीदें भी अपार थीं। ऐसे में अब जबकि योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के 6 महीने पूरे हो चुके है, जनता इस छह महीने का लेखा-जोखा चाहती है।

इसी को भांपते हुए योगी सरकार अपने छह महीने का रिपोर्ट कार्ड पेश करने जा रही है, लेकिन अपनी रिपोर्ट कार्ड के पहले योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी और बीएसपी सरकारों के कामकाज पर श्वेत पत्र जारी कर दिया था।

सवाल भी उठे कि सिर्फ समाजवादी और बीएसपी के सरकारों के ही श्वेत पत्र क्यों? पूर्ववर्ती BJP सरकारों के क्यों नहीं? फिलहाल योगी इस सवाल को टाल गए लेकिन अपनी पीठ थपथपाने से पहले मीडिया को वह खुराक दे गए, जिससे उनकी सरकार के कामकाज और पिछली सरकार के कामकाज की तुलना की जा सके। सोमवार को योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट के अपने सहयोगियों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पिछली सरकारों के श्वेत पत्र को सामने रखा। साथ ही उन्होंने अपने छह महीने के कामकाज की रिपोर्ट कार्ड के लिए एक-दो दिनों का वक्त और मांग लिया।

सबसे पहले योगी सरकार ने इन 6 महीनों में क्या खोया और उसके बाद क्या पाया का उल्लेख करेगी।

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपने संकल्प पत्र को पूरा करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया, लेकिन इन 6 महीनों में संकल्प पत्र की कुछ बड़ी घोषणाओं पर बड़ा झटका भी लगा। मसलन सरकार का सबसे बड़ा वादा बिना भेदभाव सभी को 24 घंटे बिजली देने का था, लेकिन 6 महीने गुजरने के बाद भी सरकार का बिजली का दावा उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है। जब योगी सरकार अपना 6 महीने का जश्न मना रही होगी, उसी समय यूपी के कई जिलो में बिजली का हाल बेहाल है।

इन 6 महीनों में योगी सरकार अगर किसी मुद्दे पर सबसे ज्यादा घिरी या सबसे ज्यादा आलोचना का शिकार हुई, तो वह रहा जन स्वास्थ्य का मुद्दा। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज मैं ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत ने पूरे देश में योगी सरकार के कामकाज पर बट्टा लगा दिया। हालांकि सरकार अब भी यही मानती है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई।

स्वास्थ्य के मामले में सरकार बहुत आगे नहीं बढ़ पाई है गोरखपुर में एम्स का शिलान्यास हुए 1 साल से अधिक वक्त बीत चुका है, योगी सरकार के 6 महीने गुजर चुके है मगर अब तक एम्स अस्पताल का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो सका है।

समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे अधर में लटका हुआ है. जिस एक्सप्रेसवे से योगी सरकार ने समाजवादी नाम हटाकर सिर्फ पूर्वांचल एक्सप्रेसवे रख दिया है, उसे वह आगे बढ़ाने में फिलहाल सफल होती नहीं दिख रही।

अपने शुरुआती 100 दिनों में योगी सरकार ने सड़कों के गड्ढे भरने का दावा किया था, लेकिन करीब उससे दोगुने वक्त में भी सड़कों के गड्ढे भर नहीं पाए है। 100 दिन के बाद योगी सरकार की तरफ से दलील दी गई कि भ्रष्टाचार के गड्ढे इतनी जल्दी नहीं भर सकते।गोमती रिवर फ्रंट दुर्दशा की मार झेल रहा है. गोमती रिवर फ्रंट अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था जो फिलहाल CBI जांच कि आंच झेल रहा है और अब दुर्दशा के हाल में है।

वाराणसी में वरुणा के रिवर फ्रंट का भी यही हाल है। अखिलेश यादव की सुपर स्पेशालिटी कैंसर और लीवर अस्पताल बनाने की योजना भी फिलहाल खटाई में है।

योगी सरकार अपने संकल्प पत्र के सबसे बड़े वादे किसानों का कर्ज माफ करने की योजना लागू करने में सफल रही है। हालांकि कुछ पैसे से लेकर कुछ रुपए तक की कर्जमाफी ने योगी सरकार की थोड़ी किरकिरी जरूर कराई है. लेकिन लाखों किसानों के एक लाख तक के कर्ज माफ हुए है, और फिलहाल योगी सरकार का यह वायदा जमीन पर उतरता दिख रहा है। इसके लिए योगी सरकार अपनी पीठ थपथपा सकती है।

कानून व्यवस्था पर शुरुआती कुछ महीनों में गंभीर आलोचना झेलने के बाद राज्य में अब कानून व्यवस्था योगी सरकार के काबू में आती दिख रही है। लेकिन इसके लिए योगी सरकार को एनकाउंटर का सहारा लेना पड़ रहा है। पुलिस के आंकड़े देखें तो साफ हो जाएगा कि शुरुआती 4 महीनों के दौरान तो योगी सरकार को कानून व्यवस्था को लेकर भी आलोचनाओं का दंश झेलना पड़ा। लेकिन पिछले डेढ़ महीने में एनकाउंटर कर जिस तरह बदमाशों का सफाया किया गया, उससे कुछ हद तक प्रशासन को कानून व्यवस्था पर नियंत्रण हासिल हुआ है। इन 6 महीनों में योगी सरकार की पुलिस 420 एनकाउंटर कर चुकी है, जिसमें 15 बदमाश ढेर कर दिए गए।

जिस एंटी रोमियो अभियान की वजह से पूरे देश में योगी सरकार चर्चा का विषय रही, वह पिछले कई महीनों से खत्म हो चुका है। एंटी रोमियो स्क्वाड अब चुपचाप काम कर रहा है और कुछ हद तक यह सफल भी है। शुरुआती आलोचना झेलने के बाद एंटी रोमियो स्क्वाड ने पार्कों में, रेस्टोरेंट में या सड़कों पर प्रेमी जोड़ों को निशाना बनाना बंद कर दिया और चुपचाप लड़कियों की शिकायतों पर काम करना शुरु किया, जिसके नतीजे दिखने शुरू हो गए है।

BJP ने अपने संकल्प पत्र में सरकारी और गरीबों की जमीनें दबंगों के कब्जे से खाली कराने का बड़ा वादा किया था, जिस पर योगी आदित्यनाथ ने बड़ी शिद्दत से मेहनत की और एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स बनाकर दबंगों से जमीने खाली भी करवाईं। गायत्री प्रजापति और अतीक अहमद सरीखे दबंगों से न सिर्फ जमीनें खाली कराई गईं, बल्की इनके आलीशान अवैध निर्माण भी गिरा दिए गए।

योगी सरकार अपने इन 6 महीनों के कामकाज को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। समाजवादी पार्टी योगी सरकार को इस बात को लेकर कठघरे में खड़ा कर रही है कि उसने अखिलेश के कार्यों पर ही अपना लेबल लगा दिया।


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