थम गई विकास की रफ्तार, बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों में छाई सुस्ती

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नई दिल्ली। एक तरफ देश की जनता अच्छे दिनों की बाट जोह रही है तो दूसरी तरफ महंगाई और बुुनियादी उद्योगों में सुस्ती से लोग निराश हो रहे हैं। बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर मई में 2.8 प्रतिशत के पांच महीने के निचले स्तर पर आ गई है। यह पिछले महीने चार साल के उच्चस्तर 8.5 प्रतिशत पर रही थी। कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस उत्पादन घटने से वृद्धि दर घटी है। आठ बुनियादी उद्योगों – कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली की वृद्धि दर मई, 2015 में 4.4 प्रतिशत थी। कुल औद्योगिक उत्पादन में बुनियादी उद्योगों का भारांश 38 प्रतिशत है।
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक अप्रैल में इन उद्योगों की वृद्धि दर चार साल के उच्चस्तर 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। रिफाइनरी उत्पादों तथा बिजली उत्पादन 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की वजह से यह आंकड़ा हासिल हो पाया था। मई के वृद्धि के आंकड़े पिछले साल दिसंबर के बाद की अवधि में सबसे कम हैं। उस समय बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर सिर्फ 0.9 प्रतिशत रही थी। समीक्षाधीन महीने में कच्चे तेल का उत्पादन 3.3 प्रतिशत घटा, वहीं प्राकृतिक गैस उत्पादन में 6.9 प्रतिशत की कमी आई।
इसी तरह रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन माह के दौरान 1.2 प्रतिशत ही बढ़ा। सीमेंट उत्पादन में 2.4 प्रतिशत और बिजली में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इन क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि पिछले साल के समान महीने से कम रही। मई, 2015 में इन क्षेत्रों का उत्पादन क्रमश: 7.8 प्रतिशत, 2.7 प्रतिशत तथा 6 प्रतिशत बढ़ा था।
मई में कोयला उत्पादन की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इसी महीने के 7.6 प्रतिशत से कम है। समीक्षाधीन महीने में सिर्फ उर्वरक व इस्पात उत्पादन की वृद्धि दर बढ़ी। माह के दौरान उर्वरक उत्पादन 14.8 प्रतिशत बढ़ा जबकि इस्पात उत्पादन में 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-मई की अवधि में आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2.1 प्रतिशत रही थी।

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