वायुसेना को तेजस विमान का तोहफा, जानिए क्या हैं इसकी खूबियां

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना को स्वदेशी तेजस की पहली स्क्वाड्रन आज मिलने जा रही है। सरकारी क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से पहले दो तेजस विमान वायुसेना को आज सौंपे जा रहे हैं। इससे एलसीए विमानों की पहली स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग डैगर्स’ बनाई जाएगी। ये स्क्वाड्रन पहले दो साल बेंगलुरु में ही रहेगी। वायुसेना के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब देश में निर्मित किसी युद्धक विमान की स्क्वाड्रन का सपना साकार होने जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक तेजस दुनिया में उत्कृष्ट विमान के रूप में उभर रहा है। विकसित होने के दौरान विमान ने ढाई हजार घंटे के सफर में तीन हजार बार उड़ान भरी है और इसका प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। वायुसेना में कुल 120 तेजस विमान शामिल किए जाने हैं, जिनमें उपरोक्त पहले 40 विमानों को छोड़कर बाकी मार्क-1 श्रेणी के अत्याधुनिक विमान होंगे।

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पढ़िए क्या हैं तेजस की खूबियां

ये तजस विमान अत्याधुनिक हथियारों और राडार प्रणाली से लैस होंगे।
ये हवा में ईधन भरने में सक्षम होंगे और मिग विमानों की जगह लेंगे।
तेजय 50 हजार फीट उंचाई तक उड़ान भर सकता है।
तेजस दुश्‍मन के विमानों पर हमला करने के लिए हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइलों और जमीन पर स्थित निशाने के लिए आधुनिक लेजर डेजिग्‍नेटर और टारगेटिंग पॉड्स से लैस है।
क्षमता के मामले में कई मायनों में यह फ्रांस में निर्मित मिराज 2000 के जैसा है।
तेजस का फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम जबरदस्त है और यह कलाबाजियों में माहिर है।
विमान का ढांचा कार्बन फाइबर से बना है, जो कि धातु की तुलना में कहीं ज्‍यादा हल्‍का और मजबूत होता है।
इसमें सेंसर तरंग रडार लगाया गया है, जो कि दुश्‍मन के विमान या जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल के तेजस के पास आने की सूचना देता है।

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