काले धन की खुली पोल, विदेशी बैंकों में 13000 करोड़ का खुलासा

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दिल्ली, लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए ने काले धन को एजेंडा बनाकर चुनावी रण में जीत हासिल की। लेकिन सरकार बनने के दो साल बाद भी जब सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया तो पिछले कई महीनों से विपक्ष की जुबान पर ये सवाल खास था कि आखिर काले धन पर सरकार चुप क्यों है। आखिर इस दिशा में सरकार कदम क्यों नहीं बढ़ा रही। क्या कालेधन का मुद्दा महज़ चुनावी हथकंडा या फिर वाकई सरकार काले धन पर चिंतित है। अब लगता है कि इन सवालों को जल्द ही विराम लगने वाला है। विदेशों में जमा काले धन पर सरकार की कोशिशें रंग लाती दिखाई दे रही हैं। अब तक विदेशी बैंकों में जमा 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के काले धन का पता लगा लिया है। यह आंकड़ा साल 2011 और 2013 में मिली सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। 2013 के आंकड़ों की गहराई से पड़ताल करने पर करीब 700 भारतीय लोगों के विदेशी बैंकों में खातों का पता चला है। सबसे ज्‍यादा खाते जेनेवा स्थि‍त एचएसबीसी बैंक में हैं।
इससे पहले साल 2011 में फ्रांस सरकार ने जिनेवा के एचएसबीसी बैंक में भारतीयों की ओर से जमा कराई गई रकम के करीब 400 मामलों की जानकारी दी थी. इनकम टैक्स की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन बैंक खातों में करीब 8,186 करोड़ रुपये जमा थे. काला धन पर सरकार को पता चली अब तक की यह सबसे बड़ी रकम है। इसके बाद इंटरनेशनल कंजोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स की वेबसाइट पर साल 2013 में 700 भारतीयों के विदेशी बैंक खातों का खुलासा हुआ था. इसमें 5000 करोड़ रुपये जमा होने का पता चला था. इस तरह 2011 और 2013 में मिली जानकारी को मिलाकर भारतीयों के कुल 1100 खातों में 13 हजार करोड़ रुपए की ब्लैक मनी का पता चला है।

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