अब इंटरनेट पर नहीं मिलेगी भ्रूण लिंग परीक्षण की जानकारी, 3 बड़े सर्च इंजनों ने लगाई रोक

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भ्रूण लिंग परीक्षण

हमारे देश में भ्रूण लिंग परीक्षण एक कानून अपराध है, इस अपराध को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त सज़ा के प्रावधान भी हैं। सरकार की तरफ से डॉक्टर्स और अल्ट्रा साउंड सेंंटरों को भ्रूण लिंग परीक्षण करने की सख्त मनाही है। बावजूद इसके कुछ लोग इंटरनेट पर ये जानकारी हासिल कर लेते थे कि मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग क्या है।

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अब तक इंटरनेट पर सुविधा के तौर पर ये जानकारी दी जाती थी लेकिन इस जानकारी का गलत गतिविधियों में बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इंटरनेट के कई बड़े सर्च इंजनों ने लिंग परीक्षण को बढ़ावा देने वाले व्यापारिक विज्ञापनों पर रोक लगाने का फैसला किया है।

केंद्र सरकार ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि तीन प्रमुख सर्च इंजनों- माइक्रोसॉफ्ट्र, गूगल और याहू ने लिंग परीक्षण को बढ़ावा देने वाले व्यापारिक विज्ञापनों पर रोक लगाने की सहमति जताई है।

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सरकार ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और सी. नागप्पन की पीठ को बताया कि जन्म से पहले लिंग परीक्षणों पर रोक लगाने वाले कानूनी प्रावधानों के अनुपालन के क्रम में कुछ खास की-वर्ड्स के जरिए लिंग परीक्षण से जुड़ी सूचनाओं तक पहुंचने की सुविधा पर रोक लगा दी गई है।

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सर्वोच्च न्यायालय को ऐसे की-वर्डस की एक सूची भी दी गई, जिनका इस्तेमाल अब लिंग परीक्षण की जांच तक पहुंचने के लिए नहीं किया जा सकता।

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