बदला शिक्षा का स्वरूप, अब पढ़ाई पर होगा कुल GDP का 6 फीसदी खर्च

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नई दिल्ली, केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि छात्रों को पाँचवी तक फ़ेल नहीं किया जाएगा, ज्ञान के लिए शिक्षा आयोग का गठन किया जाएगा तथा शिक्षा के छेत्र में जीडीपी को बढ़ाकर 6 फीसदी किया जाएगा यही नहीं विशेष विदेशी विद्यालयों को भारत में प्रवेश करने जैसे फैसले लिए गए हैं। नई शिक्षा नीति के चलते अब आठवीं तक के बच्चों के फेल न करने की नीति पर रोक लगाई जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बुधवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे के अहम बिंदु जारी किए। इनमें स्कूलों में छात्रों के सीखने के स्तर पर गंभीर चिंता जताई गई है।
मसौदे में कहा गया है कि आठवीं तक बच्चों को फेल नहीं करने की मौजूदा नीति को बदला जाएगा। इसकी वजह ये है कि फेल न होने की नीति की वजह से छात्रों के अकादमिक प्रदर्शन पर गंभीर असर पड़ा है। इस नीति को पांचवीं तक सीमित किया जाएगा। इसी तरह प्रस्ताव किया गया है कि आइएएस और आइपीएस की तरह शिक्षा व्यवस्था के लिए अलग अखिल भारतीय कैडर तैयार किया जाए जिसका नियंत्रण मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पास हो।
प्रस्ताव किया गया कि सभी राज्य छात्रों को पांचवीं तक की शिक्षा उनकी मातृभाषा अथवा स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में दें। इसी तरह अंग्रेजी के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे दूसरी भाषा का दर्जा देने की सिफारिश की गई है। व्यापक स्तर पर ओपन अॅानलाइन पाठ्यक्रम शुरू करने की जरूरत पर ध्यान देते हुए इस काम के लिए अलग से स्वायत्त संस्थान शुरू करने की सिफारिश की है।

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