बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेगा पाक, सिंधु जल समझौते की समीक्षा करेंगे PM मोदी  

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फाइल फोटो।

नई दिल्ली। कश्मीर के उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद से देश में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि मोदी सरकार, पाकिस्तान पर कार्रवाई के नाम पर क्या कदम उठाएगा? पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत हर विकल्प पर विचार कर रहा है। इन तमाम विकल्पों में से एक विकल्प सिंधु जल समझौते को खत्म करने का है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार(26 सितंबर) को सिंधु जल समझौते के बारे में एक अहम बैठक करने जा रहे हैं, इस बैठक में सरकार के कई उच्च अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में सिंधु समझौते के फायदे-नुकसान पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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इसके पहले भारत ने कहा था कि इस तरह के समझौते को जारी रहने के लिए ‘परस्पर विश्वास एवं सहयोग’ की जरूरत होती है। भारत के इस बयान के बाद यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि भारत सिंधु जल समझौता रद्द कर सकता है। अगर भारत ये कदम उठाता है तो पाकिस्तान के एक बड़े हिस्से के लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ सकता है।

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बता दें कि सिंधु जल समझौता 1960 में करीब एक दशक तक विश्व बैंक की मध्यस्थता में बातचीत के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच हुआ था।

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सिंधु जल संधि के अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप में पश्चिम की ओर बहने वाली 6 नदियों में से तीन (सतलुज, व्यास और रावी) पर भारत का पूरा अधिकार है, जबकि पाकिस्तान को झेलम, चेनाव और सिंधु नदियों का पानी लगभग बेरोक-टोक के मिलता है।

देश भर में लगातार संधि को रद्द करने की मांगें हो रही हैं, ताकि इस हफ्ते की शुरूआत में उरी में हुए आतंकी हमले को देखते हुए पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया जा सके।

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