जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ताओं ने GM सरसों के खिलाफ सरकार को लिखा पत्र

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फाइल फोटो।

नई दिल्ली। जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ताओं अरुणा रॉय, मेधा पाटकर और प्रशांत भूषण ने गुरुवार(22 सितंबर) को सरकार से अनुरोध किया कि जीएम सरसों को जारी करने को मंजूरी प्रदान नहीं की जानी चाहिए और इसका अध्ययन करने में देश के जैवप्रौद्योगिकी नियामक ने जो प्रक्रिया अपनाई है वह अवैज्ञानिक, अस्पष्ट और भ्रामक है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे को लिखे पत्र में इन लोगों ने कहा कि ‘‘हम अपने खाने, खेती और पर्यावरण में ट्रांसजेनिक्स के प्रति अपनी अस्वीकृति को प्रेषित करते हैं और आपसे अनुरोध करते हैं कि अपने नियामकों को जीएमओ और पर्यावरण के लिहाज से उसके जारी करने को मंजूरी देने से रोकें।’’

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पत्र लिखने वालों में पूर्व स्वास्थ्य और कृषि मंत्री, जानेमाने शिक्षाविद, सेवानिवृत्त नौकरशाह और अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल हैं, जिन्होंने कहा कि ‘‘यह केवल खासतौर पर जीएम सरसों (सभी तीनों जीएमओ) के मौजूदा मामले पर नहीं, बल्कि सभी जीएम खाद्यों पर भी लागू होता है।’’

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उन्होंने जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेसल कमेटी (जीईएसी) द्वारा गठित एक उप-समिति द्वारा जमा किये गए जीएम सरसों के जैव-सुरक्षा संबंधित आंकड़ों पर रिपोर्ट का उल्लेख किया।

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उप-समिति द्वारा रिपोर्ट जमा किए जाने के बाद इसे पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है और 30 दिन की अवधि में सभी पक्षों से टिप्पणियां आमंत्रित की गयी हैं। इसके बाद नियामक निर्णय लेगा।

हालांकि सिविल सोसायटी के सदस्यों ने जनता से प्रतिक्रिया लेने का समय बढ़ाकर 120 दिन करने का अनुरोध किया।

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