हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है: प्रणब मुखर्जी

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फाइल फोटो।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार(14 सितंबर) को हिंदी दिवस पर देशवासियों तथा हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है और जितना अधिक हम हिंदी और प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग शिक्षा, ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि में करेंगे, उतनी ही तेज गति से भारत का विकास होगा।

हिन्दी दिवस पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को भारत की राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया था। हिंदी जन साधारण द्वारा बोली जाने वाली एक सरल भाषा है। हिंदी पुरातन भी है और आधुनिक भी। इसी विशेषता के कारण हिंदी को भारत की राजभाषा का सम्मान प्राप्त है।

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उन्होंने कहा कि आज वैश्वीकरण के दौर में, हिंदी का महत्व और भी बढ़ गया है। हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। आज विदेशों में अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें बड़े पैमाने पर हिंदी में लिखी जा रही है। सोशल मीडिया और संचार माध्यमों में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है।

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राष्ट्रपति ने कहा कि ‘‘मेरा मानना है कि जितना अधिक हम हिंदी और प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग शिक्षा, ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि में करेंगे, उतनी तेज गति से भारत का विकास होगा।’’ उन्होंने कहा कि हिंदी भारतवर्ष की विविधता में एकता का भी प्रतीक है।

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, सी. राजगोपालाचारी जैसे महापुरुषों ने हिंदी को भारत की संपर्क भाषा के रूप में अपनाकर आजादी की लड़ाई लड़ी थी।

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उन्होंने कहा कि हिंदी भारतीयता की चेतना है तथा सभी प्रांतीय भाषाओं की संपर्क भाषा की भूमिका निभाती है। हिंदी और भारतीय प्रांतीय भाषाओं के साहित्य के परस्पर अनुवाद को हमें बढ़ावा देना होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि हिंदी और भारतीय प्रांतीय भाषाओं के साहित्य के परस्पर अनुवाद को बढावा देने से हिंदी तथा प्रांतीय भाषाओं में संबंध और गहरा होगा।