पंजाब प्रभारी के लिए कांग्रेस के पास नहीं नेता, कटा शीला का पत्ता, अब शिंदे की चर्चा

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दिल्ली। पंजाब प्रदेश प्रभारी को लेकर कांग्र्रेस की परेशानी कम नहीं हो रही है। पानी टैंकर घोटाले में नाम आने के बाद दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का पत्ता भी कट गया है। अब कांग्र्रेस पंजाब में दलित कार्ड खेलने पर विचार कर रही हैं। इसके लिए पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का नाम अहम हैं। हालांकि उनकी उम्र को लेकर भी कांग्रेस चिंतित है। प्रदेश प्रभारी को लेकर कांग्रेस को दो बार अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं।
गौरतलब है कि शकील अहमद को प्रभारी पद से हटाकर कांग्रेस ने कमलनाथ को प्रभारी बनाया था। 10 बार सांसद रह चुके कमलनाथ के प्रभारी बनने के साथ ही अकाली दल ने 1984 के दंगों में उनकी भूमिका को लेकर मोर्चा खोल दिया। इसे देखते हुए कमलनाथ ने खुद ही प्रभारी पद छोड़ दिया। कमलनाथ और शीला के बाद अब पार्टी हाईकमान एक बार फिर दलित कार्ड को खेलने के मूड में हैं। पार्टी पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के नाम पर विचार कर रही है। यह विचार इसलिए भी किया जा रहा है, क्योंकि पंजाब में 32 फीसदी आबादी दलितों की है। ऐसा करके कांग्रेस एक तीर से दो निशाने साध सकती है। दलित मतदाताओं को संदेश देने के लिए ही कांग्रेस विधायक दल का नेता दलित को बनाया था। हालांकि चरणजीत सिंह चन्नी विधानसभा में सशक्त नेतृत्व करने में कामयाब नहीं रहे। वहीं, विधायक भी उनके नेतृत्व में एकजुट नहीं दिखाई दिए। ऐसे में कांग्रेस प्रभारी पद पर सशक्त नेता को लेकर दलित मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर सकती है।

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