नीतीश कुमार- पहले किया शराब बिकवाने का वादा, फ़िर शराब पर ही लगा दिया बैन

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नीतीश कुमार

नीतीश कुमार ने पहले तो बिहार में शराब बनवाने और बिकवाने का बंदोबस्त किया। जब कंपनियों ने करोड़ों डॉलर का इंवेस्टमेंट कर दिया तो नीतीश कुमार ने शराब पर ही बैन लगा दिया।बीयर कंपनी कार्ल्सबर्ग इंडिया के चीफ एग्जिक्युटिव ऑफिसर माइकल जेनसन भारत के हैरान करने वाले कारोबारी माहौल और राजनीति के कारण बिजनस को अचानक होने वाले बड़े नुकसान को लेकर परेशान हैं। उन्होंने ईटी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘दुनिया में भारत सबसे मुश्किल मार्केट है, लेकिन आप इस तरह के कदम नहीं उठा सकते। यह इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस के लिए बड़ा झटका है।’

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2014 में डेनमार्क की कंपनी कार्ल्सबर्ग को पटना के पास ढाई करोड़ डॉलर की लागत से प्लांट लगाने के लिए तैयार किया था। लेकिन इसके बाद नीतीश शराबबंदी की बात करने लगे और 2015 में दोबारा सरकार बनाने पर उन्होंने पूरे राज्य में शराबबंदी लागू कर दी। इस फैसले से सरकार के रेवेन्यू पर असर पड़ने के साथ ही बहुत सी नौकरियां भी जाएंगी क्योंकि कंपनियों के पास प्लांट बंद करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।जेनसन ने बताया, ‘यह बड़ा मार्केट था, लेकिन उन्होंने 12 घंटों में ही शराबबंदी का फैसला कर लिया। अगर यह बैन बरकरार रहता है तो कंपनी अपने प्लांट को बंद कर सकती है।’ डायाजियो पीएलसी, यूनाइटेड ब्रुअरीज और मोल्सन कूर्स जैसी अन्य शराब कंपनियां भी इसी तरह की स्थिति का सामना कर रही हैं। इन कंपनियों के पास देश में तीसरी सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य बिहार में 70 से अधिक डिस्टिलरी हैं। इन यूनिट्स के साथ बिहार के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों की डिमांड भी पूरी की जाती है।

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बिहार में जौ और गेहूं जैसे रॉ मटीरियल्स के आसानी से मिलने और सस्ता श्रम उपलब्ध होने की वजह से ब्रुअरी कंपनियां राज्य में इन्वेस्टमेंट करने में दिलचस्पी ले रही थीं।बिहार सरकार ने पिछले वर्ष के अंत में देसी शराब पर प्रतिबंध लगाने और ऐल्कॉहॉल बेचने वाली दुकानों की संख्या 4,000 से घटाकर 700 करने का निर्णय लिया था। नीतीश के चुनावी वादे के अनुसार, इस वर्ष मार्च से राज्य में पूरी तरह शराबबंदी लागू कर दी गई। इससे राज्य में अवैध शराब की बिक्री बढ़ने की आशंका थी। मंगलवार को राज्य के गोपालगंज जिले में एक दर्जन से अधिक लोगों की कथित तौर पर मिलावटी शराब पीने से मृत्यु हो गई थी।

देश की बड़ी शराब कंपनियों में शामिल यूनाइटेड स्पिरिट्स को अब बिहार में बने रहने का कोई फायदा नहीं दिख रहा। डायाजियो के मालिकाना हक वाली इस कंपनी ने कहा है कि उसने बिहार से जुड़े इनपुट्स और इन्वेंटरी प्रोसेसिंग के लिए वन-टाइम प्रविजन किया है। बिहार में विस्की की खपत अधिक होती थी। देश में इंडियन मेड फॉरन लिकर (आईएमएफएल) की कुल बिक्री में राज्य की हिस्सेदारी 1.8 पर्सेंट की थी।

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