महाराष्ट्र: मराठा मोर्चों को लेकर फड़णवीस और पवार के बीच आरोप-प्रत्यारोप

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फोटो: साभार

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में पटेलों की भांति में आंदोलन की आशंका के बीच शनिवार(17 सितंबर) को राज्य की राजनीति गहमागहमी से भरी रही तथा मराठों के इन संभावित प्रदर्शनों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और राकांपा प्रमुख शरद पवार के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुआ।

फड़णवीस ने मराठी टीवी चैनल से बातचीत में पवार पर परोक्ष रूप से प्रहार किया था कि ‘अब सत्ता में नहीं रहे मराठा नेताओं’ का इन मोर्चों के पीछे हाथ है। उन्होंने राकांपा प्रमुख पर इस प्रदर्शन का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने को लेकर हमला किया।

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वहीं पवार ने कहा कि ‘‘यह दावा करना कि जो नेता सत्ता में नहीं रहे, उनका ही मराठा समुदाय के व्यापक प्रदर्शन में हाथ है, बेबुनियाद है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मराठा युवक बिना किसी नेता के हस्तक्षेप के खुद अपनी मर्जी से सड़कों पर उतरे हैं। मोर्चा भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष का संकेत है।’’

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उन्होंने कहा कि सरकार को मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग पर शीघ्र निर्णय करना चाहिए। भाजपा के मुम्बई प्रमुख आशीष शेलार ने कहा कि फड़णवीस ने समुदाय के नेताओं के साथ वार्ता के द्वार खोल दिए हैं और पवार को इस मुद्दे में दखल नहीं देना चाहिए।

वीर शिवाजी के वंशज राज्यसभा सदस्य सांबाजी राजे ने कहा कि मुख्यमंत्री को वार्ता से राजनीतिक नेताओं को दूर रखकर मराठा मोर्चा मुद्दे का हल निकालना चाहिए। इसी बीच मराठवाड़ा के हिंगोली में मराठा मोर्च के प्रति अच्छा उत्साह देखा गया।

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अहमदनगर के कोपार्डी गांव में एक नाबालिग लड़के के नृशंस बलात्कार एवं हत्या के विषय पर प्रदर्शन इस समुदाय की लंबित आरक्षण मांग को आगे बढ़ाने के लिए मंच का रूप ले लिया। लड़की मराठा था और आरोपी दलित हैं।

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