कावेरी विवाद: कर्नाटक ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करने योग्य नहीं

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फाइल फोटो।

नई दिल्ली। कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 27 सितंबर तक रोजाना 6000 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़ने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ‘अमल में नहीं लाया जा सकने’ वाला बताते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अगला कदम तय करने के लिए कल कैबिनेट की और सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

सिद्धरमैया ने संवाददाताओं से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया है। लेकिन चूंकि हमारे पास पानी नहीं है, इसलिए इसे लागू करना बहुत कठिन है। यह लागू नहीं किया जा सकने वाला आदेश है।

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उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने जमीनी हकीकत के आधार पर कावेरी सुपरवाइजरी कमेटी के सामने कुछ तथ्य रखे थे, लेकिन उसने फिर भी राज्य सरकार को 21 से 30 सितंबर तक रोजाना 3000 क्यूसेक पानी देने का आदेश जारी किया था।

उन्होंने कहा कि समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट ने ही किया है। शीर्ष अदालत ने पांच सितंबर को तमिलनाडु को समिति के पास जाने का निर्देश दिया था और कर्नाटक से भी पड़ोसी राज्य की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था।

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सिद्धरमैया ने कहा कि इस सबके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार(20 सितंबर) को आदेश पारित कर दिया। उन्होंने जनता से शांति बनाये रखने की अपील की और आश्वासन दिया कि सरकार राज्य और उसकी जनता तथा किसानों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

सिद्धरमैया ने कहा कि कल(21 सितंबर) कैबिनेट की बैठक है, हम चर्चा करेंगे। हमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति का इंतजार है। राज्य मंत्रिमंडल विचार करेगा। इस बीच हम कानूनी विशेषज्ञों से भी परामर्श लेंगे।

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उन्होंने कहा कि ‘‘मैंने कल सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। उस बैठक में हम आदेश के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे। सभी दलों के नेताओं के विचार और राय जानने के बाद हम आगे बढ़ेंगे।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक को कल(21 सितंबर) से 27 सितंबर तक तमिलनाडु को प्रतिदिन 6000 क्यूसेक कावेरी पानी देना होगा। शीर्ष अदालत ने सुपरवाइजरी समिति द्वारा तय की गयी 3000 क्यूसेक की पानी की मात्रा को बढ़ा दिया।

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