जानिए यूपी के सीएम योगी की नाथ परम्परा क्यों है खास

0
योगी
Prev1 of 4
Use your ← → (arrow) keys to browse

गोरखपुर : यूपी में 17वीं विधानसभा चुनाव में 15 वर्ष बाद भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया है। बता दें कि 1993 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर आए थे। यहां गोरक्षनाथ पीठ के महन्त अवैद्यनाथ की दृष्टि इन पर पड़ी। 1994 में ये पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ हो गया और ये नाथ संप्रदाय से जुड़ गए।

इसे भी पढ़िए :  यूपी इलेक्शन ओपिनियन पोल: सपा का संग्रम ना रूका तो बीजेपी सबको करेगी चित्त

क्या है नाथ परंम्परा

नाथ परंपरा गुरु मच्छेंद्र नाथ द्वारा स्थापित की गई थी। गोरखनाथ मंदिर उसी स्थान पर स्थित है जहां वह तपस्या करते थे। मंदिर का नाम गुरु गोरखनाथ के नाम पर रखा गया जिन्होंने अपनी तपस्या का ज्ञान मच्छेंद्र नाथ से लिया था। मच्छेंद्र नाथ, नाथ सम्प्रदाय (मठ का समूह) के संस्थापक थे। अपने शिष्य गोरखनाथ के साथ मिलकर, गुरु मच्छेंद्र नाथ ने योग स्कूलों की स्थापना की जो योग अभ्यास के लिये बहुत अच्छे स्कूल माने जाते थे।

इसे भी पढ़िए :  साइकिल नहीं मिलेगी तो ‘मोटरसाइकिल’ की सवारी करेंगे अखिलेश!

हिन्दू धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के अंतर्गत विभिन्न संप्रदायों में ‘नाथ संप्रदाय’ का प्रमुख स्थान है। संपूर्ण देश में फैले नाथ संप्रदाय के विभिन्न मंदिरों तथा मठों की देख रेख यहीं से होती है। नाथ संप्रदाय की मान्यता के अनुसार सच्चिदानंद शिव के साक्षात स्वरूप ‘श्री गोरक्षनाथ जी’ ने सतयुग में पेशावर (पंजाब) में, त्रेतायुग में गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, द्वापर युग में हरमुज, द्वारिका के पास तथा कलियुग में गोरखमधी, सौराष्ट्र में अवतार लिया था।

इसे भी पढ़िए :  पीएम बोले- कुर्सी के मोह में पिता के हमलावरों की गोद में जा बैठे अखिलेश

अगले पेज पर जानिए – अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव पर क्या करते हैं नाथ सम्प्रदाय के संत 

Prev1 of 4
Use your ← → (arrow) keys to browse

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY