अमेरिका में पुलिस अधिकारियों पर चुन-चुन कर चलाई गईं गोलियां, आखिर क्यों?

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डलास, रायटर : पुलिस गोलीबारी में अश्वेतों की मौत से नाराज एक बंदूकधारी ने अमेरिका के डलास शहर में 13 लोगों को गोली मार दी। इनमें से 12 पुलिस अधिकारी थे। पांच पुलिस अधिकारियों की गोली लगने से मौत हो गई। बाद में बंदूकधारी को रोबोट बम ने उड़ा दिया। गुरुवार शाम अश्वेतों की मौत के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान यह घटना घटी।

अमेरिका के इतिहास में पुलिस के लिए यह सबसे खूनी दिनों में से एक है। डलास के पुलिस प्रमुख डेविड ब्राउन ने बताया कि बंदूकधारी के साथ जब पुलिस ने बात करने की कोशिश की तो उसने बताया कि वह अश्वेतों की मौत से नाराज है और श्वेतों की हत्या करना चाहता है। उसने शहर के व्यस्त इलाकों में बम लगे होने की धमकी भी दी। आत्मसर्पण से इन्कार करने के बाद पुलिस ने उस जगह को रोबोट बम से उड़ा दिया जहां से वह गोली चला रहा था। मीडिया रिपोर्टो में बंदूकधारी की पहचान डलास निवासी 25 वर्षीय माइक एक्स जॉनसन के तौर पर की गई है।

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गोलीबारी की घटना होटलों और रेस्तरांओं से भरे शहर के पुराने इलाके में हुई। गोली चलते ही अफरातफरी मच गई। शुरुआत में लगा कि कई बंदूकधारी हैं और वे घात लगाकर पुलिस को निशाना बना रहे हैं। ब्राउन ने बताया कि तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पूरे शहर की हेलीकॉप्टर से निगरानी की जा रही है। चप्पे-चप्पे पर स्वचालित हथियारों के साथ पुलिस की तैनाती की गई है।

नाटो सम्मेलन में भाग लेने के लिए पोलैंड के वारसा में मौजूद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे आतंकित करने वाली घटना बताया है। उन्होंने कहा कि ¨हसा को किसी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता। डलास के मेयर माइक रॉलिंग्स ने इसे दिल तोड़ने वाली घटना बताते हुए कहा कि हमारा सबसे बुरा सपना सच हो गया है। पुलिस के नस्लभेदी रवैये के विरोध में शिकागो, न्यूयॉर्क सहित कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने यातायात बाधित कर दिया। गौरतलब है कि पिछले साल भी अमेरिका के कई शहरों में इस तरह के प्रदर्शन देखने को मिले थे।

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9/11 के बाद सबसे भीषण: 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में आतंकी हमले के बाद पहली बार किसी एक घटना के दौरान इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मारे गए हैं। उस समय 72 अधिकारियों की मौत हुई थी। ऑफिसर्स डाउन मेमोरियल वेबसाइट के अनुसार इस साल अब तक कार्य के दौरान 58 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है। इनमें से 26 की मौत गोलीबारी में हुई है।

1000 प्रदर्शनकारी, 100 पुलिसकर्मी: डलास के मेयर माइक रॉलिंग्स ने बताया कि प्रदर्शन में करीब 1000 लोग शामिल थे। सौ पुलिसकर्मी इस आयोजन के लिए तैनात किए गए थे। गोलीबारी उस वक्त हुई जब प्रदर्शनकारियों का मार्च शुरू हुआ। 1506 मौतें: वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार इस साल अब तक अमेरिका में 506 लोगों की मौत पुलिस गोली से हुई है। इनमें 123 अश्वेत थे।

प्रदर्शन क्यों
फिलांडो कैस्टाइल और एल्टन स्टर्लिग नामक अश्वेत युवकों की पुलिस गोलीबारी में मौत के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था। मिनेपोलिस में 32 वर्षीय कैस्टाइल को बुधवार को एक पुलिसकर्मी ने हथियार निकालने के संदेह में उस वक्त गोली मार दी, जब वह अपनी जेब से आइडी निकाल रहा था। मौके पर मौजूद उसकी मंगेतर ने घटना का वीडियो इंटरनेट पर जारी कर दिया। इससे ठीक पहले लुसियाना में 37 वर्षीय स्टलिर्ंग को दो श्वेत पुलिस अधिकारियों ने गोली मार दी थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने दोनों घटनाओं की आपराधिक जांच के आदेश दिए हैं।1

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सच ये भी
बीते साल श्वेतों की तुलना में अमेरिकी पुलिस ने दो गुना ज्यादा अफ़्रीकी-अमेरिकी लोगों को गोली मारी।
अफ़्रीकी-अमेरिकी अभियुक्तों पर ऐसे आरोप लगाए जाने की संभावना 75 फ़ीसदी ज्यादा रहती है, जिनमें न्यूनतम अवधि के लिए जेल की सज़ा मुकर्रर होती है।
श्वेत लोगों के मुकाबले अफ़्रीकी मूल के लोगों के साथ बल प्रयोग की आशंका 30 फ़ीसदी ज्यादा रहती है।
समान अपराध के दोषी अश्वेत लोगों 10 फ़ीसदी ज्यादा दंड मिलने की आशंका रहती है।
अमेरिका के कुल आबादी में अश्वेतों की संख्या महज 30 फ़ीसदी है, लेकिन जेल की सलाखों के पीछे बंद लोगों में उनकी संख्या आधे से भी ज्यादा है।

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