एक्सक्लूसिव K NEWS : हमारा funda clear है अगर आपसे हमारा कोई चीज associate होती है तो हम एक ही जगह stand लेंगे

K NEWS : हमारा funda clear है अगर आपसे हमारा कोई चीज associate होती है तो हम एक ही जगह stand लेंगे

अनुराग अग्रवाल, “वो जो भी है जैसे भी है कोई issue नहीं है मैं क्या कि अपना एकदम clear है कि जो चीज़ पर आप चल रहे हैं उसी चीज पर हम चल रहे हैं”


कोबरापोस्ट - May 25, 2018

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अनुराग अग्रवाल, चेयरमैन, के न्यूज़, कानपुर

कानपुर से प्रसारित होने वाले के न्यूज़ के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं हैं। ये एक हिंदी भाषी क्षेत्रिय चैनल है। जिसे 2005 में पांच प्रमोटरों द्वारा शुरू किया गया था और अनुराग अग्रवाल उनमें से एक है। इस चैनल के यूपी और उत्तराखंड के कई शहरों जैसे देहरादून, नोएडा, और लखनऊ में ब्यूरो भी हैं। वरिष्ठ पत्रकार पुष्प शर्मा की के न्यूज़ के चेयरमैन अनुराग अग्रवाल से मुलाकात हुई और पुष्प ने इन्हें अपने हिंदूत्व के एजेंडा के बारे में बताया। पुष्प ने इन्हें ये भी बताया कि उनके चैनल के साथ पहले तीन महीने को वो test and trial के तौर पर रहेंगे। पुष्प ने बताया कि उनके चैनल के लिए वो डेढ़ करोड़ का बजट लेकर आए हैं जो कि वास्तव में एक क्षेत्रीय चैनल है। पुष्प की बातें सुनने के बाद अग्रवाल कहते हैं कि बहुत सी चीजें हैं सर, अगर आप एडवांस करना चाहें तो कोई कमी नहीं है पुष्प इन्हें कहते हैं कि वो ऐसा कर सकते हैं लेकिन पहले चीजों के बारे में बातें कर लेते हैं। इसी बीच बैठक में मौजूद अग्रवाल के सहयोगी कहते हैं कि Creative team बहुत strong है सर, मतलब they are professionals

आगे अग्रवाल पुष्प को बताते हैं कि चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘K Darshan’ नाम के कार्यक्रम में हम हिंदुत्व के एजेंडा को promote करना है। इस कार्यक्रम में हम गंगा आरती और गौरखनाथ मंदिर से लाइव प्रोग्राम प्रसारित कर सकते हैं। पुष्प को ये बताते है कि इनका ‘K Darshan’ प्रोग्राम किसी एक हिंदू मंदिर के बारें में दिखाता है और दर्शकों को उसका महत्व बताता है। 

अपने चैनल के लिए एक बड़े व्यापार अवसर को देखते हुए अग्रवाल अपने ग्राहक की विचारधारा को हर हाल में पूरी करने के लिए तैयार हो जाते हैं वो कहते हैं कि  हम लोगों के साथ भी कोई ideology जुड़ती है तो हम लोग भी उसको बड़ा प्लान में कर सकते हैं देखिए हमारे पास में limited resources हैं तो हम लोग limited चल रहे हैं जब हमारे पास ऐसे संग में backing आती है तो हम उसको expand भी कर सकते हैं हमारे लिए expansion बहुत बड़ा वो नहीं है

पुष्प इन्हें बताते हैं कि वो एक प्रपोजल (प्रस्ताव) तैयार करके उन्हें दें ताकि वो उसे अपने दूसरे प्रचारकों को दिखा सकें। पुष्प इन्हें बताते हैं कि पूरी सौदेबाजी किसी तीसरी पार्टी से होगी। अग्रवाल सहमति जताते हुए कहते हैं कि कोई दिक्कत नहीं पुष्प इन्हें बतातें हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि हम नहीं चाहते कि इस अभियान के साथ हमारे संबंध स्थापित किए जाएं। पुष्प की बात पर अग्रवाल कहते हैं कि नहीं उसके बाद फिर हम भी आपको help नहीं कर पाएंगे. जैसे ही ये चीज़ खुलती हैं direct intake हो रहा है तो लोगों का जो  perception है वो खत्म हो जाता है उनको ये लगता है उन्हीं का हो गया है अग्रवाल भी इस बात को जानते हैं कि जो सौदा वो कर रहे हैं वो निष्पक्ष पत्रकारिता के मूल्यों के खिलाफ है।

पत्रकार पुष्प अब उन्हें बताते हैं कि हिंदूत्व के धार्मिक प्रमोशन के शुरुआती चरण के बाद, हमारा अभियान semi political (अर्ध-राजनीतिक) एजेंडा की तरफ बढ़ेगा  और अर्ध-राजनीतिक से आक्रामक हिंदुत्व तक चलेगा। अग्रवाल एक बार फिर सहमति जताते हुए कहते हैं कि देखिए हमारा funda clear है अगर आपसे हमारा कोई चीज associate होती है तो हम एक ही जगह stand लेंगे हमारा ये नहीं कि इधर भी ball खेलेंगे और उधर भी ball खेलेंगे और पहला तो धर्म के प्रति होता है कोई भी व्यक्ति निकलता है तो धर्म के प्रति होता है (You see, I have a clear funda)”

अब बात आती है एजेंडा के डिजॉल प्रमोशन की, जो कि अभियान का एक महत्वपूर्ण चरण है। पुष्प अब इन्हें बताते हैं कि हमारे कट्टर हिंदूवादी नेताओं जैसे मोहन भागवत, उमा भारती और विनय कटियार के भाषणों का अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रमोशन करें। अग्रवाल पुष्प को आश्वस्त करते हुए कहते हैं कि वो हो जाएगा

पुष्प इन्हें कहते हैं कि अगले चरण में हम चाहते हैं कि हमारे राजनितिक प्रतिद्वंदियों जैसे कांग्रेस, बसपा और सपा को हास्यास्पद कंटेंट के जरिए झुकाया जाए। जैसा कि ‘so sorry’ में किया जाता है और इस तरह के content को आप अपने चैनल और वेबसाइट पर चलाएं। फिर, हम आपके पूरे चैनल के साथ बुक करना चाहते हैं, क्योंकि हम किसी अन्य राजनीतिक दल को आपके एयर-टाइम तक पहुंचने नहीं देना चाहते हैं। अग्रवाल हामी भरते हुए कहते हैं कि हां बिल्कुल इसमें कोई बुराई नहीं है

चुनाव 2019 का जिक्र करते हुए, पुष्प उन्हें बताते हैं कि यह एक युद्ध है जो पांच साल में एक बार हमारे पास आता है। अग्रवाल इसके लिए पुष्प को अपने समर्थन का आश्वासन देते हुए कहते हैं वैसे भी आप देख लीजिए आपके साथ कोई खड़ा है तो आपको भी लगता है कि मुझे भी उसके साथ खड़ा होना है... तो फिर अपने साथ का बंदा है एक ही चीज़ पर चल रहे हैं, एक ही तरफ हैं हमारा एक ही directionहै और एक ही सोच है

अब पुष्प इनसे कहते हैं कि भुगतान के तरीके पर चर्चा किए बगैर समझौता नहीं हो सकता है। लिहाजा पुष्प इन्हें बताते हैं कि वो 60:40 के अनुपात में भुगतान करना चाहता है, यानी 60 फीसदी कैश और बाकी की 40 फीसदी रकम चैक द्वारा। पुष्प इन्हें बताते हैं कि उन्होंने अन्य चैनलों के साथ भी यही व्यवस्था की है। लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि अग्रवाल को ऐसा करने में भी कोई आपत्ति नहीं है। अग्रवाल पुष्प को कहते हैं कि वो जो भी है जैसे भी है कोई issue नहीं है मैं क्या कि अपना एकदम clear है कि जो चीज़ पर आप चल रहे हैं उसी चीज पर हम चल रहे हैं

कुछ समय बाद पत्रकार पुष्प, अग्रवाल को फिर फोन करते हैं ये जानने के लिए कि क्या अग्रवाल अपनी बातों से पलटे तो नहीं हैं क्या वो अब भी इस एजेंडा पर काम करने के लिए तैयार हैं। जैसे ही अग्रवाल फोन रिसीव करते हैं वो पुष्प को कहते हैं कि वो तो कब से उनसे मुलाकात की सोच रहे थे। पुष्प अग्रवाल को फोन पर कहते हैं कि वह ग्राहक को पत्रकार से मिलने की उम्मीद कर रहा है। वो अग्रवाल को बताते हैं कि जल्द ही उनके पॉइंटमैन उन्हें हिंदुत्व की जानकारियां और कुछ सीडी सौंपने के लिए मिलेंगे, पत्रकार उन्हें दो और बातें याद रखने के लिए कहते हैं जिनकी उनके चैनल को देखभाल करनी होगी। पुष्प बताते है कि हमारे पास उत्तर प्रदेश में ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और उपेंद्र कुशवाह जैसे केंद्र में कुछ गठबंधन पार्टियां हैं, जो विशेष रूप से टीडीपी के तरीकों से अलग होने के बाद पिनप्रिक्स की तरह खेल रहे हैं। इसलिए, इन छोटे साझेदारों को हर समय आपके द्वारा झुकाने की जरूरत है। इसपर भी अग्रवाल “okay” कहकर अपनी सहमति जताते हैं। पुष्प इन्हें कहते हैं कि मेरा दूसरा मुद्दा ये है कि, हमें अपने संगठन और हमारी पार्टी दोनों को संपादकीय समर्थन की आवश्यकता है। हामी भरते हुए अग्रवाल कहते हैं कि आप निश्चिंत रहिए उसके लिएबिल्कुल बिल्कुल

जब हमारे पास अग्रवाल जैसे लोग हैं, तो आप अदांजा लगा सकते हैं कि देश में मीडिया का क्या स्तर है।

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