एक्सक्लूसिव LOKMAT: During Ganpati festival, we can run a series of this thing

LOKMAT: During Ganpati festival, we can run a series of this thing

नीलेश पनहालकर, “But yeah I hate Congress”


कोबरापोस्ट - May 25, 2018

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नीलेश पनहालकर, एजवरटाइजिंग मैनेजर, लोकमत, पुणे

मराठी दैनिक लोकमत की स्थापना 1952 में स्वतंत्रता सैनानी जवाहरलाल दर्डा ने यॉटमल से साप्ताहिक के रूप में की थी। ये दैनिक हर रोड़ 18,56,000 प्रतियां बेचता है, अब लोकमत दैनिक चौथा सबसे बड़ा बिकने वाले अखबारों की श्रेणी में शुमार हो गा है। 1997 में लोकमत के संस्थापक की मृत्यु हो जाने के बाद, दर्डा की विरासत उनके बेटे राजेंद्र दर्डा और विजय दर्डा को मिल गई। विजय दर्डा तीन बार कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रहे हैं और राजेंद्र दर्डा कांग्रेस विधायक के साथ-साथ पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। ये हिंदी दैनिक CNN-IBN के साथ साझेदारी में, एक मराठी समाचार चैनल IBN LOKMAT भी चलाता है।

लोकमत अब एक बड़ा ब्रांड बन चुका है। यहां तक कि ये देश के 10 बड़े और सबसे लोकप्रिय अखबारों में से एक है। हालांकि वक्त-दर-वक्त इस अखबार पर बिकाऊ खबरें (paid news) चलाने के आरोप लगते रहे हैं। 2009 में, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर 47 पन्नों की रिपोर्टों को लेकर लोकमत अखबार का जमकर मजाक बना था। फिर 2012 में, दोनों दर्डा भाइयों को कुख्यात कोयला घोटाला में शामिल होने का आरोप लगा था।

अपने एजेंडा को लेकर पत्रकार पुष्प शर्मा ने लोकमत के पुणे कार्यालय में नीलेश पनहालकर से मुलाकात की। जैसे ही पुष्प ने नीलेश को अपने एजेंडा के बारे में बताया कि श्रीमद् भगवद् गीता प्रचार समिति मोदी की मदद के लिए 2019 चुनावों को लक्षित कर रही है, जिसके लिए वो वहां मीडिया अभियान का प्रस्ताव लेकर आए हैं, ये अभियान तीन चरणों में चलाया जाएगा।

पहला चरण गीता और भगवान श्री कृष्ण के प्रचार के माध्यम से हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए होगा। ये चरण पहले तीन महीनों के लिए चलाया जाएगा। फिर दूसरे चरण semi political होगा। पुष्प से बातचीत के दौरान नीलेश बार बार Okay कहकर उनका समर्थन कर रहे थे। अपनी वफादारी का जिक्र करते हुए नीलेश कहते हैं कि Personally thinking I really support to Modi, Sir.” (व्यक्तिगत रूप से सोच रहा हूं कि मैं वास्तव में मोदी का समर्थन करता हूं, सर) वह यह स्पष्ट करते हैं कि इस चुनाव सत्र में कर्नाटक में क्या हो रहा है On the basis of religion which I seriously like the Karnataka elections are coming up and all this nonsense going on which I seriously don’t like … But yeah I hate Congress.” (धर्म के आधार पर जो मुझे गंभीर रूप से कर्नाटक चुनाव पसंद है, और यह सब बकवास मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है...लेकिन हाँ, मैं कांग्रेस से नफरत करता हूं।) ये जानते हुए कि नीलेश उनके एजेंडा से प्रभावित हैं पुष्प इनके अखबार के लिए 3 करोड़ के बजट की पेशकश करते हैं। पुष्प इन्हें बताते हैं कि आपके पेपर को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी और उनके नेताओं जैसे हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को झुकाना होगा। नीलेश इसका जवाब "हाँ" कहकर देते हैं।

पुष्प इन्हें बताते हैं कि हिंदुत्व के पक्ष में एक अनुकूल माहौल बनाने के लिए हमारे विज्ञापन चलाते समय आप किसी भी अन्य पार्टियों से विज्ञापन स्वीकार नहीं करेंगे, बाबा रामदेव के अलावा वो किसी अन्य से न हों। नीलेश "हां, हां, हां," कहकर पुष्प की बात का समर्थन करते हैं। नीलेश मोहन भागवत, उमा भारती और विनय कटियार जैसे फायरब्रांड हिंदुत्व के नेताओं के भाषणों की डिजिटल कवरेज देने के लिए भी सहमत होते हैं। राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को तोड़ने के अपने अर्ध-राजनीतिक एजेंडे पर वापस आकर, पुष्प नीलेश से कहते हैं कि वो हास्य तरीके से या फिर व्यंग्य का इस्तेमाल करके हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को झुकाने की कोशिश करें। ताकि इस अभियान से हमारी पार्टी को चुनाव में राजनीतिक लाभ मिल सके। जवाब में नीलेश कहते हैं कि Exactly … Exactly, the long things,” (बिल्कुल ... बिल्कुल, लंबी चीजें) पुष्प के एजेंडे का पालन करने के लिए अपनी सहमति देते हुए नीलेश पुष्प को कुछ ऐसे व्यक्तियों से जोड़ने की बात कहते हैं जो उन्हें अन्य लोकमत संस्करणों में उनके एजेंडे को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। नीलेश कहते हैं “I’ll give you the right person name for you and… like Pune as well as Bombay where everything will be…”( मैं आपको आपके लिए सही व्यक्ति का नाम दूंगा ... और पुणे और साथ ही बॉम्बे जैसे सबकुछ ...) पुष्प इन्हें बताते हैं कि उनके संगठन ने कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए बजट अलग कर दिया है। पुष्प बताते हैं कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए उनके संगठन ने 742 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। जो कि बीजेपी के बजट से अलग है। अब पुष्प एक बार फिर नीलेश से ये सुनिश्चित करते हैं कि लोकमत पर प्रतिद्वंदी पार्टियों के अभियान और विज्ञापन नहीं चलने। पुष्प कहते हैं कि आपके चैनल पर सिर्फ हम ही हम दिखने चाहिए हमारे अलावा कोई और ना दिखे। सहमति जताते हुए नीलेश कहते है Exactly.”(बिल्कुल)

जाहिर है, एक बड़े ग्राहक को सेट करने की संभावनाओं से खुश होकर नीलेश पुष्प को सुझाव देते हैं कि We can do one thing also. During Ganpati festival, we can run a series of this thing, wherein you can have post to going in.” (हम एक काम और भी कर सकते हैं। गणपति उत्सव के दौरान, हम इस चीज की एक श्रृंखला चला सकते हैं, जिसमें आप पोस्ट भी कर सकते हैं)

पत्रकार नीलेश को बताते हैं, और अभियान को ज्यादा से ज्यादा दिखाना होगा। हमारे पास मोटा बजट है और इसे हम अपने अभियान के तहत प्रतिद्वंदियों को झुकाने में इस्तेमाल करेंगे। नीलेश कहते हैं कि And we have to … this It’s high time,” (और हमें यह करना ही है ... यह बढ़िया समय है) इस मीटिंग को खत्म करने से पहले पुष्प इन्हें बताते हैं कि जो लोग इस अभियान में शामिल होंगे वो इस एजेंडा को गुप्त रखें, इसपर नीलेश कहते हैं कि Yeah and they have to maintain that secrecy and privacy for all this things. It’s a more basic norm of… any business … Those ethics they should carry. So that kind of thing they will have to maintain.” (हाँ और उन्हें इन सभी चीजों के लिए उस गोपनीयता को बनाए रखना है। यह किसी भी व्यवसाय का ... मूल सिद्धांत है उस नैतिकता को ले जाना चाहिए। तो उस तरह की चीज उन्हें बनाए रखना होगा)

लोकमत अपने पाठकों के बीच लोकप्रियता के शिखर पर चढ़ रहा है लेकिन इस एजेंडा को चलाने पर जिस तरह इस अखबार के वरिष्ठ अधिकारी अपनी सहमति जता रहे हैं वो वाकई दुखद है।

OPERATION 136: PART II के रिलीज़ से करीब चार दिन पहले 21 मई 2018 को हमने एक questionnaire भेजकर लोकमत से जवाब जानने की कोशिश की कि आखिर वो इसपर क्या कहना चाहते हैं। उनकी तरफ से हमें जवाब मिला कि Nilesh Panhalkar नाम के जिस अधिकारी से आपकी टीम ने बात की है, वो लोकमत के साथ काम ही नहीं करते।

इनकी पूरी प्रतिक्रिया पढ़ने के लिए आप नीचे दिए लिंक पर click कर सकते हैं

 

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