एक्सक्लूसिव NEW INDIAN EXPRESS: हिंदुत्व एजेंडा Ok Ok

NEW INDIAN EXPRESS: हिंदुत्व एजेंडा Ok Ok

महेश बाबू, “Indian Express also close to that party. So I think we carry”


कोबरापोस्ट - May 25, 2018

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महेश बाबू, चीफ मार्केटिंग मैनेजर; जयश्री चक्रवर्ती, सीनियर मैनेजर, ऑनलाइन मार्केटिंग, न्यू इंडियन एक्सप्रेस, चैन्नई

न्यू इंडियन एक्सप्रेस का जन्म 1991 में हुआ था, जब उसके मालिक रामनाथ गोयंका ने अपने परिवार को दो अलग-अलग इकाइयों में विभाजित किया। 1931 में पी. वारादराजुलु नायडू द्वारा शुरू की गई न्यू इंडियन एक्सप्रेस और गोयंका ने 1935 में कानूनी लड़ाई के बाद स्वामित्व संभाला। हालांकि, विभाजन के बाद, मनोज कुमार सोनथेलिया के स्वामित्व वाली न्यू इंडियन एक्सप्रेस, न केवल अपने पाठकों को पीछे हटाने में सक्षम रही है, दक्षिण में अपने आधार का विस्तार भी किया और तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और ओडिशा से एक साथ प्रकाशित 22 संस्करणों के साथ हर दिन 495,618 प्रतियां बेचकर बुलंदियों को छुआ। इस समूह का एक तमिल दैनिक दीनामनी भी है, जिसे सितंबर 1933 में बैंगलोर, चेन्नई, कोयंबटूर, धर्मपुरी, मदुरै, नई दिल्ली, तिरुनेलवेली, तिरुचिराप्पल्ली, वेल्लोर और विल्लुपुरम से प्रकाशित किया गया था। 

 

पत्रकार पुष्प शर्मा न्यू इंडियन एक्सप्रेस के चेन्नई कार्यालय में पहुंचे, यह देखने के लिए कि क्या ये भी उनके एजेंडे को चलाने के लिए तैयार हैं, हालांकि, जब वो न्यू इंडियन एक्सप्रेस के चीफ मार्केटिंग मैनेजर महेश बाबू से मिले तो वो भी इस एजेंडा को अपने अखबार के साथ-साथ दिनामनी में भी प्रकाशित करने की बात कही।  

जैसा कि पत्रकार पुष्प हिंदुत्व के अपने एजेंडे पर उसे बताने लगते हैं और श्रीमद् भगवद गीता और भगवान कृष्ण के प्रचार का उपयोग करके इसे कैसे चलाया जाना है ये भी बताया, महेश बाबू कहते हैं: "हिंदुत्व एजेंडा? ओके, ओके आगे महेश पूछते हैं कि "तो आप न्यू इंडियन एक्सप्रेस और दीनामनी में विज्ञापन देने की योजना बना रहे हैं।" पुष्प कहते हैं कि हां, निश्चित रूप से, दोनों में, प्रिंट और डिजिटल। महेश जानना चाहते थे So you are planning for what type of advertisement?” (तो आप किस तरह के विज्ञापन चलवाना चाहते हैं) पुष्प इन्हें बताते हैं कि हम भगवत गीता और भगवान कृष्ण के उपदेशों के माध्यम से हिंदुत्व को बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि हम आठ-नौ महीने में इस अभियान से राजनीतिक लाभ प्राप्त कर सकें। महेश बाबू को हमारे एजेंडे के साथ कोई समस्या नहीं है, जैसा कि वह फिर से कहते हैं हिंदुत्व एजेंडा.. ओकेओके, ओके.”

पुष्प इन्हें बताते हैं कि हम यहां हमारे श्रीमद् भगवद् गीता प्रचार समिति के माध्यम से हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए हैं और पहले तीन महीनों के लिए हमारी campaign केवल भगवान कृष्ण के उपदेश पर ध्यान केंद्रित करेगा। आपके अखबार में ऐसे विज्ञापन जारी किए जाएंगे। महेश पूछते हैं "तो इस प्रकार का विज्ञापन डिजिटल और प्रिंट में दिया जाएगा।" हां, और यह हमें हिंदुत्व और हमारी पार्टी से हिंदुओं की पहचान के रूप में लोगों को जोड़ने में मदद करेगा।

महेश बाबू पूछते हैं कि अब समझना कि अभ्यास का उद्देश्य क्या है "तो विज्ञापन बड़ी जगह या छोटी जगह के नीचे आता है?" पुष्प इन्हें बताते हैं कि हम इसे जैकेट के रूप में प्रकाशित करना चाहते हैं, महेश बाबू उत्साहित होकर कहते हैं "जैकेट। वाह, वाह, वाह!" कारण स्पष्ट था क्योंकि जैकेट का मतलब बड़ा है भारी revenue यानी राजस्व मिलता है। पुष्प उसे बताते हैं कि उसने न्यू इंडियन एक्सप्रेस में अपने अभियान के लिए 10 करोड़ का भारी-भरकम बजट तैयार किया है, महेश बाबू अपनी खुशी छुपा नहीं पाते और उत्साहित होकर कहते हैं "वाह, वाह ... केवल न्यू इंडियन एक्सप्रेस समूह?" पुष्प इन्हें बताते हैं कि हां ठीक सुना आपने।

पुष्प इनसे पूछते हैं कि क्या आप हमारे soft Hindutva वाले एजेंडा को चलाने में समर्थ हैं।  इसपर महेश बाबू पुष्प को आश्वस्त कराते हुए कहते हैं कि “Yeah … No, I don’t think so. New Indian Express [is] also close to that party. So I think we [can] carry [your campaign],” (हाँ ... नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। न्यू इंडियन एक्सप्रेस भी उस पार्टी के करीब है। तो मुझे लगता है कि हम आपका अभियान ले सकते हैं)

पुष्प ये बात अच्छी तरह से जान गए थे कि अख़बार उनके राजनीतिक झुकाव के संबंध में खड़ा है, आगे वो उन्हें बताते हैं कि वो राहुल गांधी को उनके उपनाम पप्पू का उपयोग करके अपने डिजिटल मंच पर मजाक बनाना चाहते हैं। पुष्प बताते हैं कि हम ऐसी सामग्री तैयार करेंगे जिससे हम उसकी चरित्र हत्या कर सकें। राहुल गांधी पर पुष्प के एजेंडा को समझते हुए, महेश बाबू पूछते हैं: "हूं हूं, आप उसे पूरी तरह नुकसान पहुंचाना चाहते हैं?" पुष्प जवाब में कहते हैं हां और हमने पिछले दशक के दौरान राहुत गांधी को पप्पू उपनाम देने में गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल किया है ताकि चुनाव के दौरान उसे कोई गंभीरता से ना ले। महेश बाबू पुष्प के एजेंडा को पूरी तरह समझ जाते हैं और कहते हैं कि  “Okay, okay, you mean that elections means definitely people will not accept … not … there like is a funny talk only … [Yes] Not [a] mature person. Humm hum,” ("ठीक है, ठीक है, आपका मतलब है कि चुनाव में निश्चित रूप से लोग उसे स्वीकार नहीं करेंगे ... नहीं ... वहाँ एक मजेदार बात है ...कि वो परिपक्व व्यक्ति नहीं है। हां हां, ")

इस बिंदु पर जोर के बाद, अब पुष्प इन्हें बताते हैं कि उसके एजेंडे का दूसरा मकसद क्या है। पुष्प कहते हैं कि हिंदुत्व एजेंडा को अच्छी तरह से खेलने के बाद, हम चुनाव अभियान के दौरान चुनाव को ध्रुवीकरण करेंगे और इस अभियान के माध्यम से ऐसा करने में हमें मदद मिलेगी क्योंकि अन्य पार्टियां निश्चित रूप से अल्पसंख्यक कार्ड खेलेंगी। लेकिन अफसोस कि इस तरह की बेहूदा मांग को मानने के लिए भी महेश बाबू “Okay” कहकर अपनी सहमति जता देते हैं।

महेश बाबू पुष्प को एक मोटी कमाई देने वाला ग्राहक समझ बैठते हैं और वो इस ग्राहक को फंसाने की मुमकिन कोशिश में लग जाते हैं। अपने अखबार की खूबियां गिनाते हुए महेश बाबू पुष्प से कहते हैं कि “So very authentic newspaper”  यानी (दीनामनी बहुत प्रामाणिक समाचार पत्र है) पुष्प अब अपने एजेंडे को दोहराते हुए बताते हैं, हम सीधे आपसे संपर्क कर रहे हैं क्योंकि हम विज्ञापन एजेंसी को भर्ती नहीं करके 15 प्रतिशत पैसे बचा सकते हैं, क्योंकि हमारा एजेंडा बहुत गुप्त है। हम न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बहुत विश्वसनीय मानते हैं और इस शुरुआती चरण के बाद, जैसा कि हमने इस पर अपना रिश्ता बनाया है, हम 2019 में मोदीजी के चुनाव के लिए डंका बजा रहे होंगे, जिसके लिए हमने न्यू इंडियन एक्सप्रेस के लिए 50 करोड़ का बजट रखा है। हम जानते हैं कि आपका पेपर प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों से इस अभियान के जरिए हिंदुत्व का माहौल बनाने, हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को झुकाने और हमारे उद्देश्य को पूरा करने में मदद कर सकता है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस का मतलब ही गंभीर पाठकों से है। पुष्प की बात सुनकर महेश बाबू कहते हैं “Yes, yes, very serious reader … lot of things … social media plus political … plus lot of activity we have done.” (हाँ, हाँ, बहुत गंभीर पाठक ... बहुत सी चीजें... सोशल मीडिया प्लस राजनीतिक... साथ ही हमने बहुत सी गतिविधियां की हैं)

पुष्प आगे बढ़ते हैं और भुगतान के तरीके की बात करते हुए, महेश को बताते हैं कि वो 30 प्रतिशत नकदी में भुगतान करना चाहता है और बाकी 70 फीसदी चेक द्वारा। पुष्प कहते हैं कि नकद भुगतान के लिए उन्हें कंपनी के किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं है। हैरानी वाली बात ये है कि नकद (cash) स्वीकार करते समय महेश बाबू को कोई समस्या नहीं है क्योंकि वे कहते हैं: “Okay, okay, okay. So no legal documents, no need … even that this is not …” (ठीक है, ठीक है, ठीक है। तो कोई कानूनी दस्तावेज नहीं, कोई ज़रूरत नहीं है ... यहां तक ​​कि यह नहीं है ... ) इन सभी बातों पर सहमति बनने के बाद पुष्प अपने एजेंडा पर वापिस आते हुए राहुल गांधी के चरित्र हरण की बात शुरू करते हैं। ये महेश बाबू को बताते हैं कि हिदुंत्व का प्रमोशन होने के बाद आपको उनके उपनाम जैसे पप्पू का उपयोग करना होगा और मजाक बनाने के लिए उनपर व्यंग्य कसना होगा। महेश बाबू जवाब में कहते हैं कि “Okay, okay, okay. It’s anybody’s name, no, Pappu, Chintu small small [kids’ pet names].” (ठीक है, ठीक है, ठीक है। यह किसी का नाम, नहीं, पप्पू, चिंटू छोटा छोटा [बच्चों के पालतू नाम] है।)

ये आश्वस्त होने के बाद कि उनका निपुण एजेंडा न्यू इंडियन एक्सप्रेस और उसकी सहयोगी संस्था ‘दीनामनी’ प्रकाशन द्वारा चलाया जाएगा। पुष्प ने महेश बाबू से अखबार के डिजिटल हेड से मुलाकात कराने की बात कही।

इन दिनों, डिजिटल अंतरिक्ष भौगोलिक सीमाओं और समय क्षेत्र से परे दर्शकों तक पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम बन गया है। इसलिए इसके बाद पुष्प ने अपने होटल में सीनियर मैनेजर (ऑनलाइन मार्केटिंग) जयश्री चक्रवर्ती से मुलाकात की। पुष्प ये जानना चाहते थे कि क्या महेश ने चक्रवर्ती को ये एजेंडा पहले ही बता दिया गया था, पत्रकार ने जयश्री से पूछा कि न्यू इंडियन एक्सप्रेस (डिजिटल के लिए) बजट क्या है। जवाब में जयश्री ने कहा कि “[Rs.] 5 crores.” (पांच करोड़ रुपये) पुष्प जयश्री से कहते हैं कि कृपा आप हमारे अभियान के लिए एक combo deal बना दीजिए ताकि वे सौदे पर आगे बढ़ सकें। जयश्री जानना चाहती हैं कि “Okay. You want me to bring print also into it or you want only digital?” (ठीक है। आप चाहते हैं कि मैं इसमें प्रिंट भी लाऊं या आप केवल डिजिटल चाहते हैं?) पुष्प इन्हें बताते हैं कि नहीं आप प्रिंट को डिजिटल से अलग रखिए। हमारे पास डिजिटल के लिए अलग से बजट है। जयश्री कहती हैं “Only digital yeah that’s what … Okay.” (केवल डिजिटल हाँ यह है कि ... ठीक है।) जयश्री से उनके बैंक एकाउंट के बारे में जानकारी लेते हुए पुष्प इनसे दोबारा एक combo deal बनाने की बात कहते हैं। जयश्री कहती हैं कि “Fine Sir, whatever we can do for the first four months whatever you said like video banner we need to run apart from that some good quotes from Bhagwad Geeta, as banner, expendable banners and whatever.” (ठीक है, जो कुछ भी हम पहले चार महीनों के लिए कर सकते हैं जो भी आपने कहा जैसे वीडियो बैनर तरह, हमें भगवद गीता के कुछ अच्छे उपदेश, बैनर, व्यय करने योग्य बैनर और जो भी हो, वो होना चाहिए।) पुष्प इन्हें कहते हैं कि हां बिल्कुल ठीक समझा आपने लेकिन आप इस सौदे में अपने Apps को क्यों शामिल नहीं कर रही हैं। जवाब में जयश्री कहती हैं “Yeah, Apps plus web everything… yeah I will just put it and send you email,” (हाँ, एप्स के साथ वेब सबकुछ ... हाँ, मैं इसे अभी रखूंगी और आपको ईमेल भेजूंगी) पुष्प कहते हैं कि जो भी आप हमारे उद्देश्य के लिए बनाते हैं, उसे एक भगवा पृष्ठभूमि दें, पत्रकार उसे याद दिलाता है कि अभियान को कैसे चलाना है। जयश्री पूछती हैं कि “You want us to design it, everything or …?” (आप चाहते हैं कि हम इसे डिजाइन करें, सब कुछ या ...?) पुष्प इन्हें बताते हैं कि अभियान के लिए हमारे पास कई चीजें तैयार हैं। जयश्री प्रस्ताव देती हैं कि “Yeah, you can send it to us. So that we can incase … required according to the sizes and other thing, I can get it done from my designer that I can get it done. Definitely, I will work it out and send you the proposal.” (हाँ, आप इसे हमें भेज सकते हैं, ताकि हम जरूरत पड़ने पर अन्य आवश्यक चीज़ों के अनुसार इसे कर सकें ...मैं इसे अपने डिजाइनर से बनवा सकती हूं, इसे पूरा कर सकती हूं। निश्चित रूप से, मैं इसपर काम करूंगी और आपको प्रस्ताव भेजूंगी।) पुष्प इन्हें बताते हैं कि मैंने आपको पहले ही मेल भेज दिया है अब आप कभी भी उन्हें मेल कर सकती है।

जयश्री कहती हैं कि वो निश्चित रूप से ऐसा करेगी “Yeah, I will do that and also suppose in case if my boss would like to meet you so… when you [will] be coming” (हाँ, मैं ऐसा करूंगी और यह भी मान लें कि अगर मेरे बॉस आपसे मिलना चाहता हैं तो ...आप कब आ सकते हैं) पुष्प कहते हैं कि मैं अगले हफ्ते आउंगा आगे जयश्री हमें बताती हैं कि “Yeah, It [has] started …. I am getting calls from BJP also to take the campaigns in New Indian Express…” (हां वो शुरू होने वाले हैं... मुझे बीजेपी से भी बहुत कॉल आ रही हैं New Indian Express पर विज्ञापन चलवाने के लिए)

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत में से साफ हो चुका था कि ये पैसे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यही जानना पुष्प का मकसद था।

इनकी पूरी प्रतिक्रिया पढ़ने के लिए आप नीचे दिए लिंक पर click कर सकते हैं।

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