एक्सक्लूसिव OPEN MAGAZINE: you can bring in subtle Hindutva and bring along it in that way

OPEN MAGAZINE: you can bring in subtle Hindutva and bring along it in that way

कार्ल मिस्त्री,“So we can work out जिंगल्स आ गया आपका मेरा YouTube भी I’ll work things out”


कोबरापोस्ट - May 25, 2018

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कार्ल मिस्त्री, जरनल मैनेजर (एडवरटाइजिंग), मुंबई; पंकज जयसवाल, एसोसिएट पब्लिशर, मुंबई और बसब घोष, रिजनल सेल्स हेड, कोलकाता ओपन मैग्जीन

ओपन मैग्जीन आरपी-संजीव गोयंका समूह द्वारा अप्रैल 2009 में लॉन्च की गई थी। ये एक कथा-पत्रकारिता प्रारूप में लाई गई। बिजली, प्राकृतिक संसाधनों, कार्बन ब्लैक, खुदरा, मीडिया, शिक्षा, मनोरंजन और बुनियादी ढांचा जैसे व्यापारों के साथ आज इसकी कीमत 31,000 करोड़ रुपये है। इस समूह के पास स्पेंसर और सारेगामा जैसे ब्रांड हैं। ओपन राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, अंतर्राष्ट्रीय मामलों और खेल आयोजनों के रूप में अलग-अलग विषयों पर अपने समाचार विश्लेषण के लिए जानी जाती है। शुरुआत में केवल 12 शहरों में पांव जमाने वाली ओपन मैंग्जीन आज देश के कोने-कोने तक पहुंच चुकी है।

हालांकि, अप्रैल 2012 में इंडियन एक्सप्रेस ने सेना के आंदोलनों के बारे में सरकारी आशंका के संबंध में एक कहानी प्रकाशित की थी। जिसके बाद ओपन मैग्जीन को विवाद हिस्सा बनना पड़ा था। ओपन मैग्जीन के राजनीतिक संपादक हार्टोश सिंह बाल को दिए गए एक साक्षात्कार में, विनोद मेहता ने कहानी की आलोचना की थी और इसे एक plant mistake बताया था। इंडियन एक्सप्रेस के एंटरव्यू को बदनाम करने वाला बताकर, इंडियन एक्सप्रेस ने ओपन मैंग्जीन को अपने ऑनलाइन संस्करण से इंटरव्यू को हटाने और 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने के साथ साथ माफ़ी मांगने के लिए भी कानूनी नोटिस भेजा। इस विवाद के तकरीबन एक साल बाद ओपन मैग्जीन के राजनीतिक संपादक हार्टोश सिंह बाल को बर्खास्त कर दिया गया था क्योंकि इस पूरे मामले से कहीं न कहीं मैंग्जीन के मालिक संजीव गोयंका नाखुश थे। संजीव गोयंका को लगा था कि इस तरह के लेखन से मीडिया जगत में उनके दुश्मन खड़े हो सकते हैं।

इस मामले के बाद ये देखना दिलचस्प था कि क्या यहां पत्रकारिता मैनेजमेंट के अधीन हो गई थी। लिहाजा वरिष्ठ पत्रकार पुष्प शर्मा जानना चाहते थे कि ओपन मैग्जीन का टॉप मैनेजमेंट उनके घृणास्पद मीडिया अभियान को चलाने के लिए सहमत होगा या नहीं। इस सवाल को लेकर पुष्प ओपन मैग्जीन के मुबंई दफ्तर पहुंचे और यहां उनकी मुलाकात हुई  जरनल मैनेजर कार्ल मिस्त्री और ओपन मैग्जीन के एसोसिएट पब्लिशर पंकज जयसवाल से। पुष्प ने इन अधिकारियों से मुलाकात कर कोलकाता में मार्केटिंग हेड बसब घोष से भी मुलाकात की। हैरत की बात ये है कि इन सभी अधिकारियों के इंटरव्यू के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

 

पुष्प द्वारा हिंदुत्व के अपने एजेंडे के बारे में जानकारी देने के बाद, मिस्त्री ने पुष्प को अपनी पत्रिका के special supplement के लिए जाने का सुझाव दिया। मिस्त्री कहते हैं  “I can also give you one more suggestion, of this. What we do is we have a separate section. Along with the main issue, we have that entire book, which is good. So, we take up topics like lifestyle, because the type of people that is there. So you can bring in … [yes] subtle Hindutva, and bring along it in that way. I will just show you the special [supplement] of this.” (मैं आपको इसके बारे में एक और सुझाव भी दे सकता हूं। हम क्या करते हैं हमारे पास एक अलग खंड है। मुख्य मुद्दे के साथ, हमारे पास वह पूरी किताब है, जो अच्छी है। इसलिए, हम उसमें जीवनशैली जैसे विषयों को लेते हैं, क्योंकि उसे इसी तरह के लोग पढ़ते हैं। तो आप इसमें ला सकते हैं ... [हाँ] हिंदुत्व को घुमाओ, और इस तरह से इसके साथ लाओ। मैं आपको इस बारे में विशेष [पूरक] दिखाऊंगा)

आगे मिस्त्री पुष्प को कहते हैं कि “See this is something that we can conceptualize. This is what I am trying to say.” (यह कुछ ऐसा है जिसे हम अवधारणा बना सकते हैं। यही वह है जो मैं कहने की कोशिश कर रहा हूं)

इसके बाद मिस्त्री अपने संभावित ग्राहक यानी पुष्प से पूछते हैं कि “You can give ideas and throw ideas we can work out something. Think about it.” (आप विचार दे सकते हैं और विचारों के माध्यम से हम कुछ काम कर सकते हैं। इसके बारे में सोचो)

पुष्प इनसे कहते हैं कि मेघावी छात्रों को दिए जाने वाले la Ramnath Goenka Award जो कि इंडियन एक्सप्रेस समूह ने पत्रकारिता के लिए स्थापित किया है। अगर श्रीमद् भगवत गीता प्रचार समिति इस अवार्ड को प्रायोजित करेगी तो ये एक तरीके से हिंदुत्व पुरस्कार को बढ़ावा देने से कम नहीं होगा। इसपर मिस्त्री पुष्प को सलाह देते हैं कि “You can make in a way you don’t put Hindutva, you can put it in your plan(आप इस तरीक से कर सकते हैं कि आप हिंदुत्व मत डालिए आप इसे अपनी योजना में डाल सकते हैं)

पुष्प मिस्त्री को बतातें हैं कि आप घोषणा कर सकते हैं कि श्रीमद् भगवद गीता प्रचार समिति शानदार छात्रों को पुरस्कृत कर रही है, इसपर मिस्त्री बताते हैं कि “Exactly, exactly. So it could be brilliant student it could be … [yes] … achievers in different field.”  (बिल्कुल, बिल्कुल। तो यह शानदार छात्र हो सकता है यह हो सकता है ... [हाँ] ... विभिन्न क्षेत्रों में विजेता)

पत्रकार अब बताते हैं कि इस तरह के occasions के लिए हिंदुत्व शब्द का उपयोग करने की कोई ज़रूरत नहीं है, लेकिन गीता की सार्वभौमिक अपील है, इसलिए इस्कॉन है, और यदि हम गीता का जिक्र कर रहे हैं, तो इसका हमेशा अर्थ हिंदुत्व के प्रचार की ओर जाता है। इसपर मिस्त्री सहमति जताते हुए कहते हैं कि “We are not getting that word. Also we are not making it big deal, but it automatically translates.” (हमें वह शब्द नहीं मिल रहा है, इसके अलावा हम इसे बड़ा सौदा नहीं कर रहे हैं, लेकिन यह खुद-ब-खुद मुद्दे को स्पष्ट कर रहा है)

हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए इस पारस्परिक समझ पर पहुंचने के बाद, पत्रकार अब उन्हें कॉम्बो सौदे के लिए एक प्रस्ताव भेजने के लिए कहता है। इसके बाद पुष्प अपने मीडिया अभियान के लिए 3 करोड़ रुपये का बजट बताकर इनसे कहते हैं कि हमारे अभियान के अर्ध-राजनीतिक चरण (semi political phase) में, वो कांग्रेस, बीएसपी और एसपी जैसे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को झुकाना चाहते हैं, और यदि जरूरत पड़े तो आप अपनी टीम के साथ इस पर चर्चा कर सकते हैं कि इसपर मिस्त्री “Okay, fair enough,” (ठीक है, बहुत बढ़िया है) कहकर अपनी राय दी। मिस्त्री कहते हैं कि “I forget to tell you we have open avenues on YouTube also.” (मैं आपको बताना भूल जाता हूं कि हमने YouTube पर भी रास्ते खोल दिए हैं)  पुष्प पूछते हैं कि आपका मतलब सोशल मीडिया से है। मिस्त्री बताते हैं कि वे YouTube, फेसबुक और ट्विटर पर अपनी पत्रिका को कैसे बढ़ावा देते हैं, हम फेसबुक और ट्विटर और अन्य माध्यमों से मैग्जीन को प्रोत्साहित करने की कोशिश करते हैं लिहाजा पब्लिक में जाकर ये भी देख लेते हैं वहां से मिल जाता है

मिस्त्री पुष्प को कहते है कि वह हमारे अभियान को बढ़ावा देने के लिए इन प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे “So we can work out.(तो हम काम कर सकते हैं) जिंगल्स आ गया आपका मेरा YouTube भी I’ll work things out(मैं चीजों पर काम करूंगा) पुष्प इन्हें कहते हैं कि यही तो हम आपसे चाहते हैं। अब पुष्प इन्हें बताते हैं कि जब हमारे हिंदूवादी नेता जनता के लिए भाषण देते हैं, उन सभी नेताओं ने जो कहा है या करते हैं, उनका सभी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रचार करें। इसपर मिस्त्री जी कहकर अपनी रजामंदी जाहिर करते हैं। मिस्त्री पूछते हैं कि यहां सवाल ये है कि content तैयार कौन करेगा। “इसमें content मेरे को बनाना है या आप बना के मेरे को दोगे... This is my question to you (मेरा सवाल आपसे ये है) पुष्प इन्हें बताते है कि ये सब उन्हीं के ऊपर है। वो जैसा चाहें कर सकते हैं। मिस्त्री भी okay  कहकर सहमति जताते हैं। मिस्त्री डिजिटल प्रचार पर दोनों के बीच हुई चर्चा को दोहराते हैं “Twitter, Facebook वो हो गया” पुष्प मिस्त्री को याद दिलाते हैं कि उन्हें हमारे हिंदूवादी नेताओं का प्रचार करना है। इस पर भी सहमति जताते हुए मिस्त्री कहते हैं कि हां नहीं नहीं आपको जो भी डालना है आपको जो भी डालना है

अब पुष्प इनसे कहते हैं कि आपको हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के खिलाफ विश्वसनीय और प्रामाणिक समाचारों के साथ खेलना होगा। चूंकि वे चुनाव ध्रुवीकरण के लिए अपने कार्ड खेलेंगे, तो हम भी ऐसा करेंगे। जब हम इस तरह के आक्रामक अभियान में होते हैं तो हमाके पास 90 प्रतिशत काम होगा, बाकी हम प्रबंधन करेंगे। लेकिन आपको हमारे राजनीतिक संदेश देने के दौरान इसे नैतिक रूप से खेलना होगा। इस सवाल पर भी मिस्त्री “correct” कहकर अपनी सहमति जताते हैं। आगे पुष्प इनसे कहते हैं कि वह इनकी मैग्जीन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूरा विज्ञापन स्थान बुक कराना चाहते हैं, ताकि कहीं भी उनके प्रतिद्वंदियों को देखा या सुना न जा सके। इसपर एक बार फिर मिस्त्री “Correct, correct,” बोलकर समझौते पर अपनी रजामंदी की मुहर लगा देते हैं।

मिस्त्री ने ही ओपन मैग्जीन के एसोसिएट पब्लिशर पंकज जयसवाल के साथ पुष्प की बैठक की व्यवस्था की, जयसवाल को उनके सहयोगी ने पहले ही एजेंडा के बार में बता दिया था क्योंकि जयसवाल इस मुद्दे पर सीधे बात करते हैं। अब, गौर से सुनिए जयसवाल ने क्या कहा “जहां तक मुझे लगता है कि as far as agenda is concerned कोई भी अगर sponsorship करेगा कोई भी अगर advertise करेगा कोई भी कोई promote केरगा उसका एजेंडा तो रहता ही है” अभियान के पहले चरण का सौदा पक्का करते हुए पुष्प इनसे पूछते है कि क्या आपके सहयोगी मिस्त्री ने आपके मेरे अभियान के बारे में सब कुछ बता दिया है सवाल के जवाब में जयसवाल कहते हैं हां जी.. That has already been told, but if you want to brief I may discover something,” (यह पहले ही बताया जा चुका है, लेकिन यदि आप संक्षेप में बताना चाहते हैं तो मुझे कुछ पता चल जाएगा)

ये सुनिश्चित करने के लिए कि जयसवाल औपचारिक रूप से अपनी पत्रिका में एजेंडे पर सहमत होने से पहले इस एजेंडे को लेकर स्पष्ट हैं भी या नहीं, पुष्प फिर से उन्हें बताने लगते हैं कि अभियान का पहला चरण test and trial होगा जिसमें हम सिर्फ हिंदूत्व का प्रचार करेंगे। आगे पुष्प कहते हैं कि आप मुझे 3 करोड़ रुपये के लिए कॉम्बो डील दे सकते हैं। जिसमें प्रिंट और डिजिटल दोनों शामिल होंगे और फिर हमारे हिंदुत्व के नेताओं का सम्मानजनक प्रचार होना चाहिए। मिस्त्री दोबारा याद दिलाते हुए कहते हैं कि सोशल मीडिया आपने बोला था ना पुष्प मिस्त्री की बात का हां में जवाब देकर कहते है कि मेरे अभियान के लिए सारी विज्ञापन की जगह अभी से बुक कर दो। इसपर जयसवाल कहते हैं कि मुझे आप तीन-चार दिन का टाइम दे दीजिए, इसको कैसे आगे लेकर जाना है मुझे editorial में भी बात करनी है इस बारे में इसको कैसे genuinely आगे लेकर जाना है

 

पुष्प उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, और नैतिक मुद्दों पर भी चर्चा करते है। ताकि आखिर में दोनों इस समझौते पर सुरक्षित रहें। अपने संभावित ग्राहक पुष्प की बातों पर सहमति जताते हुए जयसवाल कहते हैं कि “जी, ठीक है absolutely. जब हम उस चीज़ को आगे लेकर जाएंगे तो कोई hurdles ना हों और हम उसको confidently आगे लेकर जाएंजैसे अभी आपने कहा ना कुछ चीजें आएंगी कुछ negativity आएगी उस चीज को हमने साइड करके

 

कांग्रेस, बीएसपी और एसपी जैसे राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को झुकाने के अपने एजेंडे पर आते हुए पुष्प पूछते हैं कि वे डिजिटल मीडिया पर कैसे करेंगे। पुष्प इन्हें सलाह देते हैं कि एक घटना या संगोष्ठी का आयोजन करें और एक नकली कलाकार को किराए पर रखें, जो हमारे लिए नौकरी करे। तो जब दर्शक चाय का आनंद ले रहे हों तो एक मजेदार क्षण आए जिसमें वो कलाकर व्यंगात्मक तरीके के हमारे प्रतिद्वंदियों की खिल्ली उड़ाए। पुष्प के इस विचार पर मिस्त्री कहते हैं कि वो भी हो सकता है आगे जयसवाल मिस्त्री को कहते हैं कि उसमें लिख लो जयसवाल पुष्प को कहते हैं कि टीवी स्क्रीन पर ऐसी नकली प्रसारण होने पर इसका असर पड़ेगा। Screen लगी रहती है उसमें अगर चल जाए तो बहुत अच्छा उसमें क्या होता है एकदम visibility different मिलती है इस आइडिया की सराहना करते हुए जयसवाल आगे कहते है कि It’s an innovative.कोई भी चीज innovative way में project के साथ match कर रही हैं तो why not.देखिए कुछ चीजें नहीं करेंगी कुछ चीजें करेंगी भी … right जो भी करना है confidently कर रहे हैं

उसके साथ पूरी तरह से सहमत होने पर, जब पत्रकार उसे अपने प्रस्तावित अभियान पर काम करने के लिए कहते हैं तो जयसवाल कहते है कि इसलिए मैंने आपने थोड़ा सा ही time मांगा है मुझे भी कुछ लोगों से बात करनी है क्योंकि ये process है तो आगे इस चीज को लेकर जाना चाहता हूं confidently आगे लेकर जाना चाहता हूं

आखिरकार, जयसवाल बताते हैं कि उनकी वफादारी कहां है क्योंकि वो हमें बताते हैं कि ये बहुत अच्छा काम है, ये मेरे thought processके साथ match कर रहा हैमैं आपको ये भी बता दूं मैं इससे हूं.. इससे ये personal आपको

जयसवाल के मुंह से ये सब सुनकर आप अंदाजा लगा सकते है कि एक जाने-माने मीडिया संस्थान में जिम्मेदार पद पर बैठा एक अधिकारी किस कदर पक्षपाती है। जाहिर है निष्पक्ष पत्रकारिता के क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं।  मिस्त्री और जयसवाल ही नहीं कोलकाता में बैठे इनके सहयोगी बसब घोष भी खुलकर कहते हैं कि उनकी ‘ओपन मैग्जीन’ मोदी सरकार की समर्थक है। चूंकि पुष्प घोष को संक्षेप में बताना शुरू करते हैं कि श्रीमद् भगवद् गीता और भगवान कृष्ण के उपदेशों का उपयोग करके हिंदुत्व को कैसे बढ़ावा देना है, उन्होंने घोष को बताया कि उनके हिंदुत्व एजेंडे पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसपर घोष कहते हैं कि बिल्कुल हटना नहीं है

 

पुष्प कहते हैं कि अगर कोई हिंदुत्व को पसंद नहीं करता है, तो ये उनकी समस्या है। हमें हिंदुत्व को बढ़ावा देना है पत्रकरिता को दूसरे स्थान पर रखना है,  यहां घोष कहते है कि और कोई गलत बात भी नहीं है

पुष्प कहते हैं कि लेकिन इस बार हम अयोध्या मुद्दे का उपयोग नहीं कर रहे हैं क्योंकि पार्टी द्वारा पिछले 25 वर्षों से इसे भरपूर निचोड़ा गया है। हम भगवत गीता का उपयोग कर रहे हैं जिसमें सार्वभौमिक स्वीकार्यता (universal acceptance) है और राम और अयोध्या जैसा कोई विवाद भी नहीं हैं। हम अपनी सार्वभौमिक अपील को राजनीतिक रूप से भुनाएंगे।

आगे पुष्प कहते हैं कि दूसरे चरण में, हमारा उद्देश्य उन पप्पू जिंगल्स का इस्तेमाल करके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को झुकाना है। हमने इस पप्पू शब्द को बनाने के लिए बहुत सारी "गाढ़ी कमाई" इस्तेमाल की है ताकि लोग उसे कभी गंभीरता से ना ले पाएं। अगर डिजिटल प्लेटफार्मों पर इन जिंगल्स को बढ़ावा दिया जाता है तो उसकी चरित्र हत्या (character assassination) के साथ हमारे राजनीतिक उद्देश्य भी पूरा हो जाएगा। पुष्प की बात पर सहमति जताते हुए घोष “हमम” में जवाब देते हैं। आखिरकार घोष चरित्र हत्या वाली बात पर कहते हैं “Correct, correct. आगे पुष्प फिर से उन्हें समझाते हुए कहते हैं कि हमारा एजेंडा पप्पू के कद को काटना है। सहमति जताते हुए घोष कहते हैं कि “Downsize.(कद को काटना है)

पुष्प घोष से कहते है कि हां, यही हम हासिल करना चाहते हैं। अपने एजेंडे के दो मुख्य बिंदुओं हिंदुत्व को बढ़ावा देना और राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की चरित्र हत्या को दोहराते हुए पुष्प कहते है कि वह चुनाव के दौरान सांप्रदायिक माहौल बनाना चाहते हैं क्योंकि उनके प्रतिद्वंद्वी दल अल्पसंख्यक कार्ड खेलेंगे। चूंकि पुष्प घोष को अपने सांप्रदायिक एजेंडा को ज़ोरदार तरीके से स्पष्ट करते हैं तो जवाब में घोष कहते हैं कि Hmm, definitely(बिल्कुल) … hmm,”

पुष्प इन्हें कहते है कि इन दोनों चरणों के बाद.. हम अपने अभियान को अगले चरण की तरफ बढ़ाएंगे। एजेंडा को बहुत अच्छी तरह समझने के बाद, घोष ने मोदी समर्थक ‘ओपन मैग्जीन’ की संपादकीय नीति को बताया आचार्य जी शायद आप भी busy रहते हैं आप शायद open देखते नहीं हैं regular. मैं आपको एक बात बताता हूं open जितना support करते हैं संगठन का शायद ही कोई करता होगा आप थोड़ा समय निकालिए मेरे पास पुराना issue है इनका...आप अगर कष्ट करके थोड़ा time निकाल के देखिएगा मेरा तो copy आने वाला है ये issue भी cover मोदी जी के ऊपर ही है

घोष के इस बयान के बाद ये समझने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है कि कैसे एक मीडिया संस्थान में पक्षपात की सीमाओं को लांघकर पत्रकारिता के सिद्धांतों से समझौता किया जा रहा है।

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