एक्सक्लूसिव PAYTM: संगठन को सामने नहीं लाएंगे? मैं तो संघ से बहुत जुड़ा हुआ हूं

PAYTM: संगठन को सामने नहीं लाएंगे? मैं तो संघ से बहुत जुड़ा हुआ हूं

सुधांशु गुप्ता, “हम पेटीएम एप पे क्वीज़ चलाते हैं …हम आपकी भगवत गीता के राऊंड चला देंगे”


कोबरापोस्ट - May 25, 2018

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सुधांशु गुप्ता, वाईस प्रेजिडेंट; अजय शेखर शर्मा, सीनियर वाईस प्रेजिडेंट, पेटीएम, नोएडा

पेटीएम ने 2010 में अपनी मोबाइल ऐप आधारित भुगतान सुविधा के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। इसकी स्थापना वन79 कम्यूनिकेशन के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने की थी। 2016 में इसका सबसे बड़ा ब्रेक आया जब 8 नवंबर को बीजेपी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की, जिसमें तत्काल प्रभाव से 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। नोटबंदी का प्रभाव ऐसा पड़ा कि रातोंरात ये कंपनी मशहूर हो गई, हालांकि नोटबंदी के दौरान पेटीएम को पैसा कमाने का खूब मौका मिला। अनुमान है कि मार्च 2017 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में कंपनी ने 813 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, उपयोगकर्ता आधार के हिसाब से कंपनी के व्यापार में 150 मिलियन से 200 मिलियन तक भारी वृद्धि देखी गई, जबकि आम नागरिकों की कड़ी मेहनत के पैसे बेकार हो गए और उन्हें घंटों तक बैंकों की कतार में खड़े रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। पुराने नोट जमा कराने के लिए। इस दौरान 50 दिनों में करीब 150 लोगों ने अपनी जानें गंवाईं। इस दौरान किराना तक का सामान लेने के लिए सरकार ने digital modes of payment को खूब बढ़ावा दिया। देश के करोड़ो नागरिक उस वक्त सकते में पड़ गए जब एक वीडियों में उन्होंने पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा को जनता के दर्द और मौतों पर मजाक उड़ाते देखा। एक प्रोग्राम में विजय को ये कहते देखा गया था कि हम हत्यारे हैं, हम हत्यारे हैं ... जो हमारे साथ नहीं है वो रोएंगे ... एक साल में वो किया जो उन्होंने दस साल में नहीं किया... कलेजा दिया, खून दिया, जान दी, सब कुछ लागा दिया बहनचोद

देश भर में 7 मिलियन से अधिक पंजीकृत व्यापारियों और 200 मिलियन से अधिक वॉलेट उपयोगकर्ताओं के साथ, पेटीएम अब एक बहुत ही विविध ई-कॉमर्स कंपनी है, जो भारतीय खरीदारों के लिए अनिवार्य हो रही है, फ्लिपकार्ट के बाद दूसरा नंबर इसी का है।

वरिष्ठ पत्रकार पुष्प शर्मा ने यह जांचने का फैसला किया कि क्या पेटीएम भी अपने ऐप पर उनके एजेंडे को बढ़ावा दे सकता है। हैरानी की बात है कि पुष्प अपनी इस कोशिश में निराश नहीं हुए। जब वो उपाध्यक्ष सुधांशु गुप्ता और सीनियर उपाध्यक्ष अजय शेखर शर्मा से पेटम के नोएडा कार्यालय में मिले थे। पुष्प के साथ हुई उनकी ये मुलाकात काफी चौंकाने वाली साबित हुई, क्योंकि टॉप लेवल के इन अधिकारियों ने न केवल आरएसएस के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों का खुलासा किया बल्कि यह भी स्वीकार किया कि वे अपने लाखों ऐप उपयोगकर्ताओं को केंद्र सरकार के साथ साझा करने के लिए कबूल कर सकते हैं।

पुष्प शर्मा की पहले मुलाकात सुधांशु गुप्ता से होती है इससे पहले कि पुष्प अपने एजेंडा के बारे में इन्हें बता पाते सुधांशु पुष्प को संघ और सरकार से अपने नजदीकियों को बताने में लग जाते हैं। पुष्प को एक पेटीएम ऐप दिखा कर वो कहते हैं कि “By the way मैं आपको एक चीज़ और दिखाता हूं in case you should obviously know our political affiliation … this is our Paytm app. Nowdays Mr.Modi is right here. उनकी book आई है अभी extra Exam Warriors. We are … We are actually promoting this book …

ये पुष्प को आगे बताते हैं कि इनके e-format में पीएम की बुक भी है, आगे सुधांशु कहते हैं कि “So मेरे को ना what I will have to do is I really have to understand how do you want to propagate and what is your content(मुझे क्या करना होगा मुझे वास्तव में समझना है कि आप प्रचार कैसे करना चाहते हैं और आपका content क्या है)

अपनी जिज्ञासा को पूरा करने के लिए, पुष्प इन्हें अपने एजेंडे के बारे में बताते हैं और सुधांशु से पूछते हैं कि वो कैसे पेटीम के जरिए इसे प्रमोट करना पसंद करेंगे। पुष्प की बात पूरी होते ही सुधांशु इन्हें बताते हैं कि “While you talking I am getting some ideas of that (जब आप बात करते हैं तो मुझे इसके कुछ आइडिया मिल रहे हैं)…तो हम क्या करते हैं ना हम पेटीएम एप पे क्विज चलाते हैं हम आपकी भगवत गीता के राऊंड चला देंगे  पुष्प कहते है कि हिंदुत्व को प्रमोट करने के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। सुधांशु आगे कहते हैं कि बिल्कुल वो ही क्विज चला देते हैं लोग मतलब आप विश्वास नहीं करोगे कुछ को डेली कम से कम 25-30 हजार लोग आकर ये क्विज खेलते हैं..ये चला देते हैं हम आपके लिए

इसके बाद पुष्प की इनसे एक और बैठक दिल्ली के होटल में होती है। इस बैठक में सुधांशु के साथ पेटीएम के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और विजय शेखर शर्मा के छोटे भाई अजय शेखर शर्मा भी थे। अजय शेखर पुष्प से पूछते हैं कि वह अपने ग्राहक यानी पुष्प के लिए क्या कर सकते हैं, तो पुष्प दोहराते हैं कि उसने पहले से ही उनके सहयोगी सुधांशु को इसके बारे में बताया था। दरअसल उनका एजेंडा श्रीमद् भगवद् गीता प्रचार समिति के माध्यम से हिंदुत्व का प्रचार करना है। लेकिन हम संगठन को इस अभियान के प्रायोजक के रूप में शामिल नहीं करना चाहते हैं। इसपर अजय शेखर पूछते हैं कि संगठन को सामने नहीं लाएंगे ? मैं तो संघ से बहुत जुड़ा हुआ हूं इस एक वाक्य के जरिए अजय शेखर संघ से अपने जुड़ाव का खुलासा करते हैं। आगे अजय शेखर अरुण कुमार, कृष्णा गोपाल, एस के मिश्रा और यहां तक ​​कि शिव राज चौहान से भी अपनी नजदीकियों के बारे में बताते हैं। अजय शेखर बताते है कि उनकी संघ के इन सभी बड़े नेताओं से बातचीत है, और उनसे व्यावसायिक रिश्ते भी है, “संघ में centre में मिला हुआ हूं अरुण कुमार जी, प्रफुल केल्कर जो एडिटर... मतलब मेरे कभी discussion में ये बात आई नहीं निकलकर जो बात आप बोल रहे हो मतलब मेरे हर तरह के discussion होते हैं” पुष्प इन्हें बताते है कि वह "गुप्त व्यवस्था" के तहत काम कर रहे हैं, यानी एक गुप्त व्यवस्था है, और फिर संघ तो पूरी तरह से गुप्त काम करने के लिए जाना जाता है।

आखिर में पुष्प अजय शेखर के सामने एक पैंतरा फेंकते हैं और इन्हें बताते हैं कि संघ के सुप्रीमो मोहन भागवत भी इनके आश्रम में आ चुके हैं। और वो इन्हें व्यग्तिगत तौर पर जानते भी हैं। पुष्प इनसे ये भी कहते हैं कि अगर अजय शेखर को उनपर विश्वास नहीं हो तो वो हमेशा इंटरनेट पर चैक कर सकते हैं क्योंकि सबकुछ वहां उपलब्ध है। पुष्प की बातों से अजय शेखर इस कदर उत्सुक और प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा  “इतना बड़ा काम कर रहे हैं और हम तो क्या बताएं हम क्या-क्या काम कर रहे होते हैं कुछ हम भी नहीं बता सकते आपको मतलब कुछ ऐसा काम हमसे करवाए संघ ने मैं आपको बता नहीं सकता ठीक है

लेकिन ये तो कुछ भी नहीं इसके अगले ही पल अजय शेखर जो खुलासा करते हैं वो वाकई चौंकाने वाला है। अजय शेखर बताते हैं कि पंचजन्य के संपादक केलकर उनके अच्छे मित्र हैं और कहते हैं कि “अरे मेरी दोस्ती तो उनसे दोस्ती का मतलब आप अगर पंचजन्य को उठाएंगे ना तो उसमें पेटीएम के एड दिखेंगे आपको..आप देखना कभी जाके आपको दिख जाएगा...वो उनके कहने से करे हैं हमने

अजय शेखर इस बात पर जोर देकर कहते हैं कि वह आरएसएस में विशेष रूप से केलकर से बात करेंगे। आरएसएस को इस तरह के तरीके को अपनाने की क्या जरूरत थी जबकि वो खुद उनके साथ सीधी बात कर सकते थे। अजय शेखर बड़े पैमाने पर आश्चर्य करते हैं, आगे अजय शेखर आरएसएस और बीजेपी मंत्रियों के कुछ और नाम गिरते हुए कहते हैं कि मैं थोड़ा confidence … confidence क्या मेरी समझ नहीं आ रहा कि हमसे क्यों नहीं कह रहे वो आगे पुष्प इनसे अपने गुरुजी की वीडियो उनके एप पर अपलोड करने के लिए आग्रह करते हैं। इसपर अजय शेखर पुष्प को आश्वस्त कराते हुए कहते हैं कि “नहीं नहीं वो सब हम कर देंगे अगर RSS कहेगा क्योंकि RSS तो हमारे ब्लड में है” आगे अजय शेखर बताते हैं कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं “मैं पूछूंगा करना है तो फिर उनको बताकर करेंगे हम भी तो अपने नंबर बनाएं सीधी सी बात है जब इतना कर चुके हैं तो करना ही क्या है

अजय शर्मा एक तरफ कहते हैं कि वह बचपन से आरएसएस के करीब है, और दूसरी तरफ  हमें बता रहे हैं कि हम बिजनेस से जुड़े हुए हैं। ये साबित करने के लिए कि वे सरकार और आरएसएस दोनों के करीब कितने करीब हैं, अजय शेखर ने एक और खुलासा किया “जब JK में बंद हुए थे ना पत्थर... तो हमारी personally PMO से फोन आया था कहा गया था कि data दे दो हो सकता है कि Paytm user हों?

जैसा कि paytm का दावा है “हम आपकी व्यक्तिगत जानकारी किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचेंगे, साझा नहीं करेंगे या अनचाहे email और sms के लिए email address या मोबाइल नंबर इस्तेमाल नहीं करेंगे। paytm द्वारा भेजे गए कोई भी email या sms केवल सहमत सेवाओं के तहत होता है जो की इस गोपनीय नीति के प्रावधान के संबंध में होता है" लेकिन तहकीकात में ये भी पता लगा कि ये उनकी इस नीति का पूरी तरह उल्लंघन है। सरकार के साथ data share करते वक़्त भी paytm ने अपनी सुरक्षा नीति का भी उल्लंघन किया “हमारे नियंत्रण में जानकारी के नुकसान, दुरुपयोग और परिवर्तन की सुरक्षा के लिए पेटीएम के पास कड़े सुरक्षा उपाय हैं। जब भी आप अपनी खाता जानकारी बदलते या एक्सेस करते हैं, तो हम एक सुरक्षित सर्वर का उपयोग करते हैं। एक बार आपकी जानकारी हमारे कब्जे में हो जाने के बाद हम सख्त सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, इसे गलत हाथों में पहुँचने के खिलाफ सुरक्षित करते हैं।”

बीजेपी और संघ के बड़े नेताओं से अपने संबंधों का जिक्र करने के बाद अजय शेखर एक और खुलासा करते हैं। ये बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीया का जिक्र करते हुए कहते हैं कि “देखो ये जो कैलाश जी हैं ये मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं.. मतलब इन्होंने हमारे बहुत काम किए हैं.. मेरे एक दोस्त बंगाल में IPS है, इनके लिए बहुत काम कर रहा है वो इस टाइम.. ये शिवराज जी हैं इनसे ओह मतलब ये जानते हैं अजय शेखर

 

आगे पुष्प कहते हैं कि मोहनभागवत जी उनके गुरूजी से मिलने आश्रम आए थे और वहां पर उन्होंने इन सब बातों पर चर्चा की थी। लिहाजा ऐसा कुछ है कि आप इसपर उनसे बात करें और कहें कि उन्होंने सीधा आपको आदेश क्यों नहीं दिया। इसपर अजय शेखर कहते हैं कि “नहीं छोटी नहीं है मैं मान रहा हूं लेकिन जब मैं मोहन भागवत जी के साथ सारे काम कर रहा हूं और मोहन भागवत जी कहें भैया तुम ये कर रहे हो तो उनको बता तो दूं कि आपके लिए कर रहा हूं

केंद्र और अन्य राज्यों में आरएसएस और बीजेपी सरकारों के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों के इस तरह के खुलासे हैरानजनक हैं। सवाल ये खड़ा होता है कि पिछले कुछ वर्षों में पेटीएम ने जिस तरह जबरदस्त तरक्की हासिल की है क्या उसके पीछे इस भगवा ब्रिगेड का हाथ तो नहीं। केंद्र में सरकार बनाने वाली बीजेपी ने एक साल के भीतर ही यानी अप्रैल 2015 में पेटीएम ने भारतीय रेलवे के साथ एक समझौते में प्रवेश किया, जिसमें पेमेंट वॉलेट टिकटिंग से संबंधित transactions के लिए स्वीकार्य था, और उसी वर्ष दिसंबर में, आईआरसीटीसी ने घोषणा की कि Paytm ऐप के इस्तेमाल से आप रेलवे में खानपान सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। यह वह साल था जब पेटीएम और इसकी होल्डिंग कंपनी ने चीनी ई-कॉमर्स प्रमुख अलीबाबा के जैक मा जैसे निवेशकों के साथ विजय शेखर शर्मा के venture में निवेश किया था। उस वर्ष मार्च में जैक मा ने भारत का दौरा किया और वो प्रधान मंत्री मोदी से मिले थे। इसके अगले ही साल बीजेपी सरकार ने डिजिटल इंडिया के लिए अपना अभियान शुरू किया। हालांकि, "surgical स्ट्राइक" शुरू होने से दो महीने पहले, पेटीएम अपनी उपस्थिति में सर्वव्यापी बन गया था, समाचार पत्रों के पहले पन्नों में और प्राइम टाइम टेलीविजन के ब्रेक स्लॉट्स में पेटीएम का कब्जा होने लगा था। यहां तक कि पेटीएम ने अपने विज्ञापनों में पीएम मोदी को ब्रांड एम्बेस्डर के तौर पर प्रस्तुत किया। हालांकि बाद में इसे हटा दिया गया। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि विजय शेखर ने अपने विज्ञापनों में से एक में पीएम मोदी को उनके साहसी फैसले के लिए सराहा भी। हालांकि नोटबंदी से आम जन बेहाल हुए लेकिन दूसरी तरह यही नोटबंदी पेटीएम के लिए आविष्कार साबित हुई। नोटबंदी के दौरान पेटीएम ने विज्ञापनों में मोटा पैसा खर्च किया और जन-जन तक अपनी पहुंच बनाने की भरपूर कोशिश की।

पेटीएम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हुए खुलासे वाकई किसी को भी हैरान परेशान कर सकते हैं। 

 

 

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