Monday 17th of December 2018
VARTMAN: that is not permissible
एक्सक्लूसिव

VARTMAN: that is not permissible

कोबरापोस्ट |
May 25, 2018

आशीष मुखर्जी,“that is not permissible”


आशीष मुखर्जी, सीनियर जनरल मैनेजर (एडवरटाईज़मेंट सेल्स), बर्तमान पत्रिका, कोलकाता

किसी खास एजेंडे से चलने वाली आज की पत्रकारिता के दौर में जब खबरें सिर्फ खरीद-फरोख्त की चीजें बनकर रह गई हैं। पुष्प शर्मा की तहकीकात में ऐसे दो मीडिया संस्थान भी सामने आए जहां पत्रकारिता बिकाऊ माल नहीं है। इसके दो जीवंत उदाहरण दैनिक संवाद और वर्तमान पत्रिका हैं। दोनों ही स्थानीय समाचार पत्र हैं। ये दोनों अखबार इसलिए भी बेमिसाल हैं कि ये क्षेत्रिय भाषा के अखबार हैं। क्षेत्रिय भाषाई अखबारों पर हमेशा से एजेंडा पत्रकारिता करने का आरोप लगता आ रहा है।यह ऑपरेशन 136 की जांच पड़ताल के दौरान यह स्पष्ट हो चुका है कि क्षेत्रिय अखबार इस तरह की पत्रकारिता में सबसे आगे हैं।

आनंदबाजार पत्रिका के बाद वर्तमान पत्रिका दूसरा सबसे लोकप्रिय बंगाली समाचार पत्र है, जिसके पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी, बर्दवान और मिदनापुर से तीन संस्करण प्रकाशित होते हैं। 1984 में ये हिंदी दैनिक पत्रकार वरुण सेनगुप्ता ने शुरू किया था, जो अब तक आनंदबाजार पत्रिका के साथ काम करते थे। पुष्प शर्मा ने वर्तमान के सीनियर जर्नल मैनेजर आशीष मुखर्जी से मिलने के लिए वर्तमान पत्रिका के कोलकाता कार्यालय का दौरा किया। जैसे ही पुष्प ने इन्हें अपने उद्देश्य यानी हिंदुत्व के एजेंडे के बारे में और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने के बारे में बताया, मुखर्जी ने एजेंडा को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि “… that is not permissible.”

पुष्प ने लालच देते हुए मुखर्जी को बजट बढ़ाने की बात कही और सीधे एक करोड़ के बजट से बढ़ाकर 10 करोड़ बता दिया। लेकिन हैरानी वाली बात ये थी कि मुखर्जी ने फिर भी एजेंडा चलाने से इनकार कर दिया । मुखर्जी ने कहा “It’s not …” पुष्प फिर से उन्हें मनाने की कोशिश करते हैं, और कहते हैं कि आप इस पैसे के लिए अपना आदर्शवाद नहीं छोड़ेंगे। मुखर्जी दृढ़ होकर एजेंडा को अस्वीकार करतें हैं। और दो टूक जवाब में कहते हैं "नहीं"

हालांकि जिस पत्रकार ने इस अखबार को जिन मूल्यों के साथ पाल पोसकर बड़ा किया था उन्हें गुज़रे हुए दो दशक हो चुके हैं लेकिन वो मूल्य आज भी जिंदा हैं।


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