समंदर में चीन चल रहा खतरनाक चाल, भारतीय क्षेत्र में ड्रैगन ने तैनात किए कई पनडुब्बी
राष्ट्रीय

समंदर में चीन चल रहा खतरनाक चाल, भारतीय क्षेत्र में ड्रैगन ने तैनात किए कई पनडुब्बी

|
September 26, 2022

{}



सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच एक महीने से जहां गतिरोध जारी है वहीं चीन ने भारतीय समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी तैनात कर दी है।

युआन क्लास की ये पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बी क्षेत्र में तैनात की जाने वाली 7वीं पनडुब्बी है। भारत की ओर से इस पनडुब्बी को हाल में भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करते देखा गया।

भारतीय नौसेना ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ओर से भारतीय समुद्री क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ने के बारे में साउथ ब्लॉक को अवगत कराया है। पनडुब्बी के साथ चीनी नौसेना पोत (CNS) चोंगमिंगडाओ का सपोर्ट भी देखा गया।

बता दें कि चीनी युद्धपोत और पनडुब्बियों को तीन साल पहले 2013-14 में भारतीय समुद्री क्षेत्र में देखा गया था। तब अदन की खाड़ी में बनावटी एंटी पाइरेसी ऑपरेशन्स का हवाला दिया गया था। तब (2013-14 में) तीन युद्धपोतों- दो डेस्ट्रॉयर्स और एक सपोर्ट शिप का छोटा बेड़ा था। उसके बाद से चीनी युद्धपोतों का भारत के आसपास के जलक्षेत्र में संदिग्ध ढंग से घूमने का सिलसिला बढ़ता ही गया।

हाल में भारतीय सैटेलाइट्स और नौसेना निगरानी तंत्र ने कम से कम 14 चीनी नौसेना पोतों को भारतीय समुद्री क्षेत्र में घूमते देखा। इनमें आधुनिक लुआंग-3 और कुनमिंग क्लास स्टील्थ डेस्ट्रॉयर्स भी शामिल हैं।

अच्छी बात ये है कि भारतीय नौसेना चीनी पोतों की हर हरकत पर बारीकी से नजर रखे हुए है। अमेरिका निर्मित्त P81 जैसे लंबी दूरी के सर्विलांस प्लेटफार्म्स और सैटेलाइट्स की मदद से भारतीय समुद्र में चीनी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ उनकी रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।

दिसंबर 2013 में पहली चीनी परमाणु पनडुब्बी को देखा गया था। शांग क्लास- न्यूक्लियर प्रोपेल्ड पनडुब्बी भारत के आसपास करीब तीन महीने फरवरी 2014 तक तैनात रही थी। इसके बाद 2014 में ही अगस्त से दिसंबर के बीच और तीन महीने तक सोंग क्लास- डीजल इलेक्ट्रिक-पनडुब्बी क्षेत्र में रही। इसके बाद हान क्लास परमाणु पनडुब्बी को देखा गया।

बीते साल चीन ने हान क्लास परमाणु पनडुब्बी और एक पारंपरिक पनडुब्बी को भारत के आसपास के समुद्री क्षेत्र में तैनात किया। ये दोनों करीब छह महीने तक भारतीय समुद्र के आसपास जासूसी करते रहे।

मौजूदा साल में भी भारतीय समुद्री क्षेत्र में युआन क्लास की पनडुब्बी को भारतीय नौसेना ने देखा। 2017 में चीन ने ये पहली पनडुब्बी इस क्षेत्र में भेजी।

भारत के लिए ये फिक्र बढ़ाने वाली बात है कि युद्धपोतों की ज्यादा मौजूदगी के साथ ही हाइड्रोग्राफिक, ओशेनोग्राफिक नौकाओं, जासूसी वाले जहाज भी समुद्र तल को मापने के लिए भारतीय समुद्र में तैनात किए जा रहे हैं। बाथीमीट्रिक डेटा भी उन चीजों में शामिल है जिनके जरिए पता लगाया जाता है कि एक गहराई विशेष में पानी की धारा और आवाज किस तरह का बर्ताव करती हैं। समुद्री तल के बारे में ये जानकारी पनडुब्बियों की तैनाती के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।

कुछ महीने पहले चीन ने एलान किया था कि वो अफ्रीका के किनारे पर स्थित देश जिबूती में बेस तैयार कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि “ये पहल चीन के बढ़ते प्रभाव, इसकी सशस्त्र सेनाओं की पहुंच का बढ़ना दिखलाती है।”


If you like the story and if you wish more such stories, support our effort Make a donation.




Loading...

If you believe investigative journalism is essential to making democracy functional and accountable support us. »