Wednesday 23rd of September 2020
कोबरापोस्ट स्पेशल रिपोर्ट: नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड में एक और घोटाला
Exclusive

कोबरापोस्ट स्पेशल रिपोर्ट: नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड में एक और घोटाला

महेश डोनिया और मालिनी चक्रवर्ती |
December 28, 2019

{पेशेवरों और नौकरशाहों के एक गुट ने सेवा-निवृत्ति के वर्षों बाद से घोटाले-ग्रस्त प्रीमियर डेयरी विकास संगठन को अपना पसंदीदा खेल का मैदान बना डाला और एक और घोटाला करने के लिए छह उत्पादक कंपनियों को बनाकर मदर डेयरी से उनके लिए दूध की खरीद करवा रहा है। इस तरह से यह भारी धनराशि खींच रहा है। ये सीधे तौर पर डेयरी किसानों के हित को चोट पहुंचाना और डेयरी सहकारी आंदोलन को कमजोर करने जैसा है। }



नई दिल्ली (28 दिसम्बर 2019): कोबरापोस्ट द्वारा पब्लिक डोमेन में उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल से पता चला है कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के उच्च प्रबंधन ने अवैध रूप से छह उत्पादक कंपनिया बनाई और उनमें 475 करोड़ रुपए के सार्वजनिक धन की खपत की। सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला, नौकरशाहों की मजबूत सांठगांठ, कुछ सेवानिवृत्त, लेकिन अभी भी जुड़े हुए लोग, और पेशेवरों ने अंजाम दिया जिन्होने एनडीडीबी को खुद की जागीर बना ली है। गौरतलब है कि एनडीडीबी ने विश्व में डेयरी फार्मिंग में सबसे सफल और सबसे बड़े सहकारी आंदोलनों में से एक “ऑपरेशन फ्लड” की स्थापना की, जो वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादकों में से एक बनाता है।

कोबरापोस्ट के पास उपलब्ध दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि NDDB ने अपनी सहायक कंपनी NDDB Dairy Services यानि NDS के माध्यम से साल 2013 से 2015 के बीच छह उत्पादक कंपनियों को बनाने में मदद की और उन्हें 475 करोड़ रुपए से ज्यादा का अनुदान दिया। ये कंपनीयां है Paayas Milk Producer Company Ltd., Maahi Milk Producer Company Ltd., Saahaj Milk Producer Company Ltd., Shreeja Milk Producer Company Ltd., Baani Milk Producer Company Ltd. और Bapudham Milk Producer Company Ltd. जबकि एनडीडीबी के पास ऐसा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जब एनडीडीबी act उसको निजी तौर पर आयोजित संस्थाओं को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं देता है, तो इसकी सहायक NDS ऐसा कैसे कर सकती है? हालांकि NDDB केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के साथ एक सहायक कंपनी बना सकता है, लेकिन कोई भी चरणबद्ध सहायक कंपनी नहीं बना सकता है।

अजीब बात यह भी है  कि NDDB ने मदर डेयरी, NDS और इन सभी उत्पादक कंपनियों सहित अपनी सभी सहायक कंपनियों को सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) 2005  जैसे कानूनों के दायरे से बाहर रखा है। हमारा विश्लेषण उन संदिग्ध कृत्यों को सामने लाता है जो उस भावना को कमजोर करते हैं जिसके साथ भारत के मिल्क मैन, कुरियन ने सरकार को इसके निर्माण करने में मदद की थी।

कोबरापोस्ट की पड़ताल के खास बिन्दु इस तरह है:

- एनडीडीबी ने अपनी सहायक कंपनी एनडीएस के माध्यम से अन्य सहायक कंपनियों का गठन किया है, जिसे वह उत्पादक कंपनियों को बुलाती है, हालांकि एनडीडीबी के पास ऐसा करने के लिए कोई अधिकार नहीं है।

- केंद्र सरकार की राष्ट्रीय डेयरी योजना (एनडीपी) के तहत छह निजी उत्पादक कंपनियों को 475 करोड़ रुपए अनुदान में दे दिये गए।

- इनमें से केवल पाँच कंपनियों का आंकड़ा ही साल 2014-15 और 2017-18 की  NDDB की वार्षिक रिपोर्ट में नज़र आया।

-हैरानी की बात है कि Bapudham Milk Producer Company Ltd.  के आंकड़े इन वार्षिक रिपोर्टों में नहीं है।

- हालांकि इन उत्पादक कंपनियों को न खर्च की हुई धनराशि वापस करनी थी, लेकिन NDDB ने न केवल उन्हें न खर्च किए हुए धन का उपयोग करने की अनुमति दी बल्कि उप-परियोजनाओं के कार्यान्वयन की अवधि को एक और साल  तक बढ़ाते हुए उत्पादक कंपनियों के लिए ज्यादा धनराशि स्वीकृत की।

इनमें Paayas Milk Producer Company Ltd. जयपुर, राजस्थान; Maahi Milk Producer Company Ltd. राजकोट, गुजरात; Saahaj Milk Producer Company Ltd. आगरा, उत्तर प्रदेश; Shreeja Mahila Milk Producer Company Ltd. तिरुपति, आन्द्रप्रदेश; Baani Milk Producer Company Ltd. पटियाला, पंजाब और Bapudham Milk Producer Company Ltd. मोतीहारी, बिहार शामिल है। 

S. No.

Name of the Producer Company

Years of Funding

Amount Funded by NDDB (in Rs. lakh)

1.

Paayas Milk Producers Co. Ltd.

2012–13 to 2018–19

11,610.83

2.

Maahi Milk Producers Co. Ltd.

2012–13 to 2018–19

9960.91

3.

Saahaj Milk Producer Co. Ltd.

2012–13 to 2018–19

12,309.83

4.

Shreeja Milk Producer Co. Ltd.

2012–13 to 2018–19

5817.18

5.

Baani Milk Producer Co. Ltd.

2012–13 to 2018–19

4487.82

6.

Bapudham Milk Producer Co. Ltd.

2016–17 to 2018–19

3335.88

Total

47,522.45

सूत्रों के मुताबिक एनडीएस ने 10 और उत्पादक कंपनियों का गठन किया है, और इन सभी निजी उत्पादक कंपनियों को बढ़ावा देते हुए उनके द्वारा खरीदे गए सभी दूध को खरीदने के लिए एनडीएस मदर डेयरी का इस्तेमाल कर रही है। मदर डेयरी द्वारा प्रतिदिन 3 मिलियन लीटर दूध की खरीद की जाती है, सूत्रों का कहना है कि उत्पादक कंपनियों से लगभग 2.25 मिलियन लीटर दूध ज्यादा दाम पर खरीदा जाता है और बाकी डेयरी किसान सहकारी समितियों से खरीदा जाता है। सूत्रों के मुताबिक यह देश में डेयरी सहकारी आंदोलन को कमजोर करने का एनडीडीबी का प्रयास है।

NDDB के सूत्रों का कहना है कि उत्पादक कंपनियों का निर्माण न केवल NDDB के कानूनी अधिकार के विपरीत ही नहीं बल्कि डेयरी किसान सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के अपने उद्देश्य के विपरीत भी है। हालाँकि यह सब डेयरी किसान के नाम पर किया जा रहा है लेकिन एनडीएस के बोर्ड में कोई डेयरी किसान या उत्पादक कंपनी का प्रतिनिधि नहीं है। इसके विपरीत, NDDB में राज्य सहकारी डेयरी संघ के दो प्रतिनिधि हैं।

यह स्पष्ट है कि एनडीडीबी के टॉप मैनेजमेंट को सत्ता के गलियारों में इतना प्रभाव प्राप्त है कि वे संगठन को आरटीआई अधिनियम और नियंत्रक और महालेखा परीक्षक जैसे संस्थानों के दायरों से दूर रखने में सफल हो गए हैं। स्टोरी से संबंधित पक्षों का जवाब जानने के लिए कोबरापोस्ट ने 26  दिसम्बर 2019 को उन्हें ये प्रश्नावली भेजी है। जिसका जवाब स्टोरी पब्लिश किए जाने तक हमे नहीं मिला लेकिन हमने जवाब आने पर उसे स्टोरी में शामिल किए जाने का वादा किया था। 23 जनवरी 2020 को हमें एनडीडीबी की प्रतिक्रिया मिली जिसमें उन्होने ख़बर में किए गए दावों को गलत बताया। एनडीडीबी के पूरे जवाब को पढ़ने के लिए यहाँ click करें।    

  

ये स्टोरी मूल रूप से अंग्रजी में है जिसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे। 


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