प्रैस विज्ञप्ति: कोबरपोस्ट का खुलासा

Monday, 3 August 2026Cobrapost Newsdesk
प्रैस विज्ञप्ति: कोबरपोस्ट का खुलासा
जानिए डीएलएफ ने किस तरह कमला पसंद कुनबे के तीन सदस्यों की तथा-कथित कृषि कंपनी को महज चार साल के भीतर 52.45 करोड़ रुपये मुआवजे का भुगतान किया। डीएलएफ ने यह भुगतान 10 करोड़ रुपए की एवज में किया जिसको चौरसिया कुनबे के सदस्यों ने डीएलएफ से प्लॉट खरीदने के लिए जमा किए थे। हैरत-अंगेज़ बात ये है कि इस सौदे में न तो किसी प्लाट की कोई सेल डीड दर्ज हुई न ही प्रॉपर्टी ट्रांसफ़र हुई। यह सारा भुगतान डीएलएफ और उसकी पाँच सहयोगी कंपनियों की ओर से किया गया। यही नहीं इन सभी डीएलएफ कंपनियों ने अपने बहीखाते में प्रॉफेश्नल फीस के रूप में दर्ज किया।

नई दिल्ली (अगस्त 3, 2026 ): वैधानिक फाइलिंग, एमसीए रिकॉर्ड्स और डीएलएफ लिमिटेड की खुद की प्रकाशित वार्षिक रिपोर्टों के विश्लेषण से पता चला है कि रियल एस्टेट के कारोबार में पहली पांत में शुमार डीएलएफ लिमिटेड ने कमला पसंद कुनबे के तीन सदस्यों को 52.45 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह भुगतान ब्लॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी के जरिये किया गया जिसकी स्थापना आयुषी चौरसिया, विजय आनंद चौरसिया और मयंक चौरसिया ने फरवरी 2016 में की थी। ब्लॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी की स्थापना के तीन महीने के अंदर आयुषी चौरसिया, विजय आनंद चौरसिया और मयंक चौरसिया और उनके चाचा आनंद कुमार चौरसिया चारों मिलकर ने इस कंपनी में 15.11 करोड़ रुपये निवेश किए। इसके बाद इन्हों ने डीएलएफ लिमिटेड से प्लॉट खरीदने के लिए 10 करोड़ रुपये जमा किया। इसके लिए ब्लॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी और डीएलएफ एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए। लेकिन किसी तरह की सेल डीड दर्ज़ नहीं की गई और न ही कोई प्रॉपर्टि खरीदार ब्लॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी की नाम दाखिल हुई।

तीन साल के बाद 10 करोड़ की जमा राशि के एवज में डीएलएफ ग्रुप ने 2019–20 चौरसिया कुनबे के स्वामित्व की इस कंपनी को 62 करोड़ रुपये से ऊपर का भुगतान कर डाला। यानि महज चार वर्ष के अंदर इस कंपनी ने 10 करोड़ रुपये के निवेश की एवज में 52.45 करोड़ का यानि पाँच गुना मुनाफा बटोर लिया। इस भुगतान से पहले ब्लॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी और डीएलएफ ग्रुप की इन छै कंपनियों ने एमओ'यू को निरस्त करने के लिए एक डीड पर हस्ताक्षर किए।

हैरत-अंगेज़ बात यह है कि इन कंपनियों ने यह भुगतान छोटे-छोटे हिस्सों में किए लेकिन इन भुगतनों की अपने बहीखातों में 'प्रॉफ़ेशनल फीस' के रूप में दर्ज किया।

कोबरपोस्ट इन्वेस्टिगेशन के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

  1. बलॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी का रजिस्ट्रेशन 23 फरवरी 2016 को डी-137, न्यू राजेंद्र नगर, नई दिल्ली के पते से हुआ। इसके सभी पार्टनर परिवार के सदस्य बने: आयुषी चौरसिया की इस कंपनी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी, , मयंक चौरसिया की हिस्सेदारी 49.99 प्रतिशत और विजय आनंद चौरसिया की हिस्सेदारी 0.01 प्रतिशत दर्ज की गई।
  2. एलएलपी ने कुल ₹15.11 करोड़ जुटाए, जिसमें से ₹7.61 करोड़ तीन पार्टनर्स से आए और ₹7.50 करोड़ आयुषी के चाचा आनंद कुमार चौरसिया से कर्ज के रूप में। इसमें से 10 करोड़ की राशि डीएलएफ से प्लॉट खरीदने के लिए जमा की गई।
  3. इसके लिए डीएलएफ लिमिटेड और उसकी पाँच कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करके बाकायदा करार हुआ। लगभग चार वर्ष तक यह राशि डीएलएफ के पास जमा रही। इस बीच कोई सेल डीड रजिस्टर नहीं हुई, कोई प्लॉट ट्रांसफर नहीं हुआ, कोई पजेशन नहीं दी गई।
  4. यानि कि यह सारा बंदोबस्त सिर्फ कागजी था।
  5. वित्त वर्ष 2019-20 में दोनों पक्षों यानि खरीदार और विक्रेता कंपनियों ने एमओयू निरस्त करने के लिए एक कैंसलेशन डीड साइन की। इसके बाद ₹10 करोड़ की जमा राशि वापस की गई और उसके ऊपर ₹52,45,43,037 का मुआवजा दिया गया। भुगतान की यह रकम डीएलएफ ग्रुप की इन 6 इकाइयों के जरिये दी गई:
  6. डीएलएफ लिमिटेड — ₹13.64 करोड़
  7. डीएलएफ प्रॉपर्टी डेवलपर्स — ₹9.77 करोड़
  8. डीएलएफ रियल एस्टेट बिल्डर्स — ₹9.49 करोड़
  9. डीएलएफ रेजिडेंशियल पार्टनर्स — ₹9.07 करोड़
  10. डीएलएफ रेजिडेंशियल डेवलपर्स — ₹7.02 करोड़
  11. डीएलएफ यूटिलिटीज — ₹3.44 करोड़
  12. डीएलएफ की इन सभी कंपनियों ये सारे भुगतान अपने बहीखातों में प्रॉफेश्नल फीस के रूप में दर्ज़ किए।
  13. डीएलएफ ने ये सारे भुगतान ट्रैंज़ैक्शन मैटेरियलिटी सीमा से नीचे रखे ताकि इसे सेबी के रेगुलेशन 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को इनके बारे में बताना न पड़े।
  14. भुगतान के बाद डीएलएफ लिमिटेड ने अपनी पाँच कंपनियों को डीमर्जर/मर्जर के जरिये अस्तित्व से मिटा दिया ताकि इन संदेहास्पद भुगतानों पर किसी की नज़र नहीं पड़े।
  15. बलॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी के खाते में 52.45 करोड़ जमा होने के बाद आयुषी चौरसिया ने 2019–20 से धड़ाधड़ विदेशी मुद्रा खरीदी। इसके बाद 2023–24 से वह दुबई के जाबील से अपने टैक्स रिटर्न फाइल करने लगी।
  16. हमारे विश्लेषण से यह भी पता चला है कि आयुषी ने 2016–17 में कैपिटल टैक्स गेन की घोषणा की थी। वर्ष 2020–21 में उसका सेकुरिटीज पोर्टफोलियो 18.80 करोड़ का था जो आगे चलकर 78 करोड़ का हो गया।
  17. जाहिर है कि इस पूरे बंदोबस्त की सबसे बड़ी लाभार्थी आयुषी चौरसिया प्रतीत होती है

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत कृषि संबधित कारोबार से जुड़ी किसी भी कंपनी में कोई भी आप्रवासी भारतीय निवेश नहीं कर सकता। फिर जिस तरीके से डीएलएफ चौरसिया कुनबे की कंपनी और उसके जरिये उसके सदस्यों को लाभ पहुंचाया है वह कई सवाल खड़े करता है। जाहिर है इन सवालों का जवाब सिर्फ गहरी छान-बीन की जरिये ही मिल सकता है।

इस खुलासे के प्रकाशन से पहले कोबरा पोस्ट ने डीएलएफ लिमिटेड, आयुषी चौरसिया और बलॉसम फार्मिंग एस्टेट्स एलएलपी को एक विस्तृत प्रश्नावली (Questionnaire) भेजी है। जिनके सभी जवाब पूर्ण और बिना संपादन के प्रकाशित किए जाएंगे।

इस स्टोरी के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, कृपया Cobrapost.com पर जाए।

कोबरापोस्ट टीम

दिनांक : 3 अगस्त 2026

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