नोटबंदी से भरा सरकारी खजाना, यहां से आए 6, 000 करोड़ और सरकार हो गई मालामाल

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सरकार द्वारा 500 और 1000 के पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सरकार ने अघोषित टैक्स डिपॉजिट पर तकरीबन 6 हजार करोड़ रुपए जुटाए हैं। उन्होंने कहा कि यह संख्या और भी बढ़ सकती है।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, टैक्स अधिकारियों ने उन सभी लोगों से ब्यौरा मांगा है जिन्होंने नोटबंदी के बाद पुरानी करेंसी को अपने या दूसरे के अकाउंट में एक मुश्त जमा कराया है। वहीं, कई ऐसे भी लोग हैं जो सजा से बचने के लिए एमनेस्टी स्कीम के तहत अपनी अघोषित आय पर 60 फीसदी टैक्ट पेनाल्टी देने को तैयार हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे भी बढ़ा कर 75 फीसदी कर दिया है।

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एसआईटी चेयरमैन जस्टिस एम बी शाह के साथ काला धन के खिलाफ ईडी, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स , सीबीआई और अन्य एजेंसियों द्वारा चलाए गए अभियान की निगरानी कर रहे पसायत ने कहा, ‘टैक्स अधिकारियों ने अब तक करीब 6,000 करोड़ रुपये इकट्ठे किए हैं।’

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रिपोर्ट में कहा गया है कि पसायत एसआईटी के चेयरमैन जस्टिस एम बी शाह के साथ ईडी, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स, सीबीआई और दूसरी एजेंसियों द्वारा चलाए गए अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

हालांकि पसायत ने यह बताने से इंकार कर दिया कि टैक्स से अभी तक कुल कितना कैश जुटाया गया है, लेकिन उम्मीद जताई की यह बड़ा अमाउंट होगा। उन्होंने बताया कि नोटबंदी के बाद पहले चरण में काले धन के खिलाफ चलाए गए अभियान में केवल 50 लाख या उससे अधिक जमा करने वालों पर नजर रखी गयी थी। इस तरह  के जमाकर्ताओं को एसएमएस या ई-मेल भेजे गए हैं।  उन्होंने बताया कि कई लोग सजा से बचने के लिए टैक्स देने को तैयार हो गए हैं और ओडिशा जैसे गरीब राज्य में हजारों लोगों को ऐसे ईमेल और एसएमएस भेजे गए हैं।

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