बलूच की आवाज बना AIR, आकाशवाणी ने शुरू की मोबाइल ऐप और वेबसाइट

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फोटो: साभार

नई दिल्ली। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र और दुनिया के अन्य भागों में रहने वाले बलूच भाषी लोग अब कंप्यूटर और मोबाइल फोन के जरिए आकाशवाणी ट्यून कर सकते हैं। भारत के लोक प्रसारक ने शुक्रवार(16 सितंबर) को इस सेवा के लिए मल्टीमीडिया वेबपेज और मोबाइल ऐप की शुरूआत की।

प्रसार भारती के अध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश ने मोबाइल ऐप और वेबपेज की शुरूआत करते हुए कहा कि यह कदम लोगों के आपसी संपर्क के लिए पड़ोस तक पहुंचने की भारत की कोशिश का हिस्सा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में बलूचिस्तान और पीओके के लोगों पर पाकिस्तानी अत्याचार के मुद्दे उठाया था, जिसके बाद बलूची में आकाशवाणी ने डिजिटल मंच शुरू करने का कदम उठाया।

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भरत ने पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र की एक बैठक में बलूचिस्तान में अत्याचार के मुद्दे को भी उठाया। प्रसार भारती के अधिकारियों ने कहा कि मोबाइल ऐप और वेबपेज की शुरूआत सेवा में इजाफे की तरह है। आकाशवाणी की बलूच सेवा 1974 से ही वजूद में है।

सूर्य प्रकाश ने कहा कि ‘‘आकाशवाणी द्वारा कई भाषाओं में प्रसारण होता है। बलूची में आज हो रहा है अन्य भाषाओं में भी होगा।’’ सूर्य प्रकाश ने कहा कि ‘‘विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते दुनिया भर की सच्ची और वास्तविक खबर और सूचना प्रसारित करना हमारी जिम्मेदारी है।’’

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मौजूदा स्थिति को देखते हुए क्या आकाशवाणी की सेवा के समक्ष पाकिस्तान में अवरोध होगा, आकाशवाणी के महानिदेशक एफ शहरयार ने कहा कि रेडिया सेवा शार्ट वेब पर है जिसे ब्लॉक नहीं किया जा सकता।

सवालों पर शहरयार ने कहा कि हालांकि आकाशवाणी का मकसद किसी तरह का प्रचार करना नहीं है, सही सूचनाओं को प्रसारित कर मिथ्या चीजों को चुनौती दी जाएगी। शहरयार ने कहा कि फिलहाल रोजाना बलूच भाषा में एक घंटे का कार्यक्रम होता है, लेकिन भाषा में कार्यक्रमों का अभाव है और विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में समर्थन करने का आश्वासन दिया है।

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सूर्यप्रकाश ने कहा कि आकाशवाणी की बलूची सेवा बहुत लोकप्रिय रही है, लेकिन कुछ अन्य प्रसारकों से इसे स्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ‘‘लेकिन आकाशवाणी को लेकर बलूच लोगों में बहुत सद्भावना है, जिनका भावनात्मक जुड़ाव है और इसे सूचना का वास्तविक स्रोत माना जाता है।’’

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