इंदिरा की तरह मोदी भी बलूचिस्तान को कराएंगे आजाद, दोहराएंगे 1971 का लम्हा!

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बलूचिस्तान

पीएम मोदी के बलूचिस्तान पर दिए बयान के बाद से बलूच नेताओं में जोश आ गया है। उसके बाद से ही बलूच रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष ब्रहमदाग बुगती भी सुर्खियों में हैं। अब बुगती आजादी की जंग को और तेज करना चाहते हैं। वह अब रणनीति बनाने में जुट गये हैं। लेकिन थोड़े डरे भी हुए हैं। उन्हें लगता है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में उनके लोगों पर और बुरी तरह टूटेगी। हिन्दी समाचार पत्र एनबीटी ने जिनीवा में बसे बुगती से विस्तार से बात की। बुगती ने खुलकर अपनी बात रखी। बुगती बलूच नेता नवाब अकबर बुगती के पोते हैं जो पाकिस्तानी सेना के हमले में मारे गए थे। पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश-

सवाल- पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर पूरे देश ने जिस तरह बलूचिस्तान का मामला उठाया है,उससे बलूचिस्तान में क्या राय बनी?

बुगती- घुप्प अंधेरे में रोशनी की तरह भारत के पीएम मोदी साहब की बात हम बलूच के लोगों के लिए सामने आयी है। अभी सबसे पहली जरूरत थी कि पाकिस्तान का जुल्म और सितम हम पर जो किया जा रहा है वह पूरे विश्व तक सामने आए। ऐसे में भारत जैसा वर्ल्ड पावर ही ऐसा कर सकता है। हम भारत की हुकूमत, मीडिया और लोगों से गुजारिश करते हैं कि वह बलूचिस्तान के लोगों का दर्द और पाकिस्तान का जुल्म पूरे विश्व के सामने लाए। मैंने सुना कि भारत के कुछ नेता तर्क दे रहे हैं कि भारत को बलूचिस्तान के मामले में दखल नहीं देना चाहिए क्योंकि कई दूसरे देशों में भी ह्यूमन राइट का उल्लंघन होता है। हम उन्हें कहना चाहेंगे कि कुछ नहीं तो कम से कम बतौर पड़ोसी तो हम आपके मदद के हकदार तो हैं ही।

सवाल-अब जब भारत ने खुलकर बलूचिस्तान का मामला उठा दिया है तो अब आपके लिए अगली चुनौती क्या है?

बुगती- भारत को अब यह भरोसा दिलाना होगा कि उसकी प्रतिक्रिया कश्मीर के मौजूदा हालात को काउंटर करने भर के लिए नहीं है और वह हमारे संघर्ष के लिए गंभीर है। भारत की लगातार मदद की हमें जरूरत है। यह एक दिन का मसला नहीं है। हम चाहते हैं कि पीएम मोदी वैसा ही लम्हा दें जैसा 1971 में इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश मामले में दिया था। आज पूरा बलूचिस्तान पीएम मोदी और भारत से 2016 में 1971 का लम्हा दोहराने की दुआ कर रहा है। लेकिन सबसे पहली और बड़ी चुनौती है कि विश्व के सामने हमारे केस को रखने तक पूरी तरह साथ रहे।

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सवाल-बलूचिस्तान की जमीनी हालात क्या है? वहां क्या हो रहा है?

बुगती-बलूचिस्तान में पाकिस्तान की ओर से जिनोसाइड (नरसंहार) हो रहा है। हर दिन दर्जनों युवकों की हत्या पाकिस्तानी सेना कर रही है। हजारों लोग गायब हैं। बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल नहीं है। खाने तक को नहीं मिलता है। सदियों पहले भी ऐसे हालात नहीं थे जैसे अब हैं। गुलाम बनाकर छोड़ा है हम बलूच वालों को ही अपने ही घर में। ऐसी बदतर और भयावह जिंदगी पूरे विश्व में किसी की भी नहीं होगी जैसी हम बलूच वालों की है। चूंकि बाहर हमारी दुर्दशा के बारे में जोर से आवाज नहीं उठती, पाकिस्तान उसका फायदा उठा रहा है। लेकिन अब भारत के नये रुख से हमें उम्मीद बढ़ी कि हमारे जुल्म की आवाज सुनी जाएगी। बलूचिस्तान में किसी मीडिया के जाने की मनाही है। कोई अगर वहां के हालात को दिखाने की कोशिश करे तो पाकिस्तानी सेना उसकी भी हत्या करवा देगा। बस सरकार प्रायोजित मीडिया बलूचिस्तान की गलत तस्वीर दिखाकर विश्व को गुमराह करने का काम करती है। हमें आतंकी कहा जाता है। हमारे भाईयों के बीच लड़ाने की कोशिश नहीं है।

सवाल-आप बलूचिस्तान में चाहते क्या हैं?

बुगती- हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि हमें अपना हक मिले। बलूचिस्तान पाकिस्तान का कभी हिस्सा रहा ही नहीं। यूएन हो या कोई इंटरनैशनल न्यूट्रल एजेंसी, वह बलूचिस्तान में जनमत संग्रह करा ले। मैं पाकिस्तान को भरोसा दिलाता हूं कि अगर इस जनमत संग्रह में लोगों ने जो भी फैसला लिया, वह मुझे मंजूर होगा। मैं उसका सम्मान करूंगा। यही वादा पाकिस्तान को भी करना होगा। लेकिन जबरन पाकिस्तान हमपर अपना निर्णय न थोपे। नहीं तो हम जवाब देंगे, दे रहे हैं।

सवाल-आप जिनीवा में रहते हैं। यहां से बलूचिस्तान के संघर्ष को किस तरह कंट्रोल करते हैं?

बुगती-लोगों से जुड़ने में सोशल मीडिया हमारी सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी है। हम टि्वटर, स्काइप और फेसबुक से जुड़ रहे हैं। विश्व में कहीं भी बलूच के लोग हैं, वह आपस में जुड़ गये हैं। मैं हमेशा बलूचिस्तान में फोन से जुड़ा रहता हूं। लेकिन इसके भी खतरे हैं। मैं जिनसे भी बात करता हूं, उनतक पाकिस्तान आर्मी पहुंच कर उन पर जुल्म करती है। कई को तो सिर्फ इस कारण मार दिया कि उसने मुझसे बात की थी। मेरी हर बात तक उनकी नजर है। लेकिन हम भी झुकने वालों में नहीं है। आजादी मिलने तक जंग जारी रहेग। पाकिस्तान भूल गया है कि जो इतिहास भूलता है वह उसे दोहराने का अभिशाप भोगता है। पहले बांग्लादेश उसके हाथ से निकला, अब बलूचिस्तान आजाद होकर रहेगा।

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सवाल-भारत से और कुछ अपेक्षा?

बुगती-मैं जिनीवा में छुप कर रहता हूं। लेकिन मेरी चाहत है कि मैं दिल्ली में रहूं। मैं भारत से गुजारिश करता हूं कि वह हमें और तमाम बलूच के भाईयों को अपने देश में जगह दें। हम दिल से भारत के ही अधिक करीब हैं। भारत से बहुत करीबी और अपनापन सा लगता है। अभी हम पराए की तरह विश्व के अलग-अलग देशों में भटक रहे हैं। अगर मुझे भारत बुलाए तो अगले पल में मैं दिल्ली में रहूंगा। हजारों सालों का नाता भारत और बलूचिस्तान का है। हमारे पुरखें एक ही रहे हैं। मैं भारत में रहना चाहता हूं। बलूचिस्तान के लोग शाहरुख खान की फिल्में देखते हैं, सोनू निगम लता मंगेशकर के गाने सुनते हैं। पाकिस्तान नहीं, भारत की फिल्में देखते हैं। हम दिल-दिमाग से भारत से अधिक जुड़ा महसूस करते हैं।

सवाल-पाकिस्तान बलूचिस्तान के मामले में कश्मीर का हवाला देता है। क्या दोनों की तुलना हो सकती है?

बुगती-पाकिस्तान का बकवास तर्क है। कश्मीर और बलूचिस्तान का मामला पूरी तरह अलग है। कश्मीर भारत का हिस्सा सबकी सहमति से है। एक डेमोक्रेटिक सिस्टम है। वहां की हुकुमत लोगों की हिफाजत करती है। कभी सुना कि कश्मीर में सेना हवाई जहाज से बम गिरा रही है। मिसाइल दाग रही है। बेगुनाहों को मारने के लिए सरकार आर्डर कर रही है। लेकिन बलूचिस्तान में सेना हर जुल्म करती है। बच्चों और औरतों तक को नहीं छोड़ती है। दोनों की तुलना ही गलत है। पाकिस्तान भारत में आतंक को भेजता है। भारत भी पाकिस्तान के आतंक का शिकार है। यह भारत की शरीफियत है नहीं तो विश्वपावर भारत पाकिस्तान को मिनटों में कड़ा सबक सिखा सकता है।

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सवाल- क्या 32 साल की उम्र में इस तरह की जिदंगी,जिसका कोई ठिकाना नहीं,कुछ मिस नहीं करते?

बुगती- बहुत मिस करता हूं। मेरी भी चाहत थी कि दूसरे लड़कों की तरह जीवन में रिलैक्स करूं। पिछले दस सालों से इधर-उधर भटक रहा हूं। भाग रहा हूं। शुरू में मुझे भी लगता थाा कि दोस्त हो, गर्ल फ्रेंड हो, लेकिन जब अपने बाकी बलूच के लोगों की दुर्दशा देखी तो लगा कि उन्हें मेरी जरूरत है। फिर मैंने अपना सब कुछ दे दिया। मैं बलूचिस्तान का भगत सिंह बनना चाहता हूं। मुझे अपनी जान की परवाह अब नहीं। दर्जनों बाद पाकिस्तान ने मुझे मारने की कोशिश की। मेरे घर पर बम मारे गये। लेकिन हर बार संयोग से मैं बचा। मैं चार साल बलूचिस्तान के पहाड़ों में छिपा रहा। फिर चार साल अफगानिस्तान में रहा। अब तो बस एक ही मंजिल है। अपने लोगों के लिए जीना है, मरना है।

सवाल-चीन भी पाकिस्तान को शह दे रहा है?

बुगती-हां। चीन भी पाकिस्तान को हर तरीके से शह दे रहा है। लेकिन उसे पाकिस्तान से भी कोई सरोकार नहीं है। चीन की नजर सिर्फ बलूचिस्तान के खनिज और संपदा पर है। वह इलाके के रिसोर्स का भरपूर आर्थिक लाभ उठाने की जुगत में है। पाकिस्तान को इसकी समझ नहीं है। जिस दिन पाकिस्तान से मतलब निकल जाएगा,चीन उसे निकाल फेंकेगा। अभी मतलब के लिए चीन हर जरूरत में पाक के साथ दिखता है।

सवाल-ग्लोबल स्तर पर बलूचिस्तान मामले में पाकिस्तान को अभी तक घेरा नहीं जा सका है अगर हालात इतने बुरे हैं तो?

बुगती-यही तो मेरा पॉइंट है। बलूचिस्तान विश्व का एक ऐसा ब्लॉक क्षेत्र बन गया है जहां से इसकी आवाज कहीं नहीं सुनाई देती है। यही कारण है कि पहली बार जब भारत ने हमारे मामले को उठाया तो अब पाकिस्तान को कड़े सवालों का सामना करना पड़ेगा। अपने स्पीच में जहां मोदी साहब ने बलूचिस्तान का मामला उठाया वहां कई देशों के प्रतिनिधि भी थे। हम भारत से सपोर्ट मिलने के बाद हमारा टारगेट विश्व के तमाम देशों और संगठनों तक बलुचिस्तान के हालात के बारे में सही जानकारी पहुंचाना है। इसका रास्ता दिल्ली होकर ही गुजरता है।

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